नवेद शिकोह
आज भाजपा ने लखनऊ के क्लार्क्स अवध होटल में पत्रकारों के लिए आम की आम बैठक की। आमंत्रण पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो गया था इसलिए आम और ख़ास पत्रकारों के साथ फट्टर पत्रकारों के झुंड के झुंड भाजपा की आम की दावत मे पंहुच गये।पत्रकार मन मिलन समारोह में आम के गिफ्ट बांटने वाले भाजपाइयों और पत्रकारों के मन ही नहीं शरीर भी मिल गये।
आम की दावत में खूब आम खाने के बाद आम के पैकेट बंटने थे। जैसे ही गिफ्ट पैकेट बंटने का सिलसिला शुरु हुआ दर्जनों पत्रकारों ने आम बांटने वालों को घेर लिया। ऐसा लपके के एक दूसरे पर गिरने लगे। पत्रकार मन मिलन कार्यक्रम में मन मिला हो या ना मिला हो पर एक दूसरे का शरीर मिल गया। पैकेट पाने की तड़प में पत्रकार एक दूसरे पर चढ़े हुए थे।
भीड़ ज्यादा थी इसलिए जो लूट पाया उसे आम का पैकेट मिल गया। जो लूटने में नाकाम हुआ वो मायूस हो गया। कुछ इज्जतदार पत्रकार ये सब देखकर शर्मिंदा हो रहे थे। कह रहे थे यहां आकर गलती कर दी। ऐसी तमाम प्रतिक्रियाओं में लखनऊ के वरिष्ठम और सम्मानित पत्रकार अजय वर्मा जी की टिप्पणी इस ख़बर के साथ.सलंग्न है।

इस घटना के बाद मैंने दसवीं बार उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति से मांग की है कि पत्रकारों को बदनाम करने वाली ऐस शर्मनाके घटनाओं को खत्म करने के लिए कोई कदम उठाया जाया।
प्रेस सम्मेलनों का टाइम शेड्यूल सैट करने के उद्देश्य से तीस बरस पहले संवाददाता समिति का गठन हुआ था। तीन दशक में पत्रकारिका की सूरत बदल चुकी है। अब जरूरत इस बात की है कि प्रेस कांफ्रेंस में लूट मचाने वाले पत्रकारों पर क़ाबू करें।







