डॉ दिलीप अग्निहोत्री
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया। लेकिन उनकी सहयोगी रही आनन्दी बेन का प्रारंभिक जीवन इसकी मिसाल था। जिस समय देश में बालिका शिक्षा का ज्यादा प्रसार नहीं था, उस समय आनंदी बेन को उनके शिक्षक पिता ने प्राथमिक विद्यालय भेजा था। उनके क्लास में मात्र तीन बालिकाएं थी। आनंदीबेन होनहार थीं। केवल पढ़ाई ही नहीं स्पोर्ट में भी वह अव्वल रहीं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह शिक्षिका बनी। राजनीति और सत्ता के गलियारों से चलते हुई, वह राज्यपाल बनी। इस रूप में वह राज्य के विश्विद्यालयों की कुलाधिपति होंगी।उत्तर प्रदेश में उन्हें उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर विरासत मिल रही है। यह उनके लिए राहत की बात है। उनके पूर्ववर्ती राम नाईक ने उच्च शिक्षा में अनेक सुधार किए है। आनन्दी बेन को इसी राह पर आगे बढ़ना होगा। उनका पिछला प्रशासनिक अनुभव इसमें सहायक होगा। वह स्वयं शिक्षिका रही है। शिक्षा में सत्र के नियमित रहने, शैक्षिक कलैण्डर, शिक्षा की गुणवत्ता के महत्व को वह समझती है। वह गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार में शिक्षा मंत्री भी रही है। इस रूप में भी उनका काम बहुत शानदार रहा था।
इसके पहले पांच वर्ष तक राम नाईक बतौर राज्यपाल उत्तर प्रदेश के बत्तीस विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति रहे। उन्होंने जब दायित्व संभाला उस समय उच्च शिक्षा की स्थिति खराब थी। राम नाईक ने अनुभव किया था कि यहां शिक्षा और शोध की गुणवत्ता बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। सत्र और दीक्षांत समारोह भी समय पर होने चाहिये। शोध और शोध पीठों का लाभ समाज को मिलना चाहिए। इन सभी क्षेत्रों में राम नाईक ने कारगर सुधार किए। छात्राओं का प्रतिशत पहले चालीस प्रतिशत था वह अब बढ़कर छप्पन प्रतिशत पहुंचा है। शैक्षिक सत्र गत वर्ष सम्पन्न हुये दीक्षान्त समारोह में छांछठ प्रतिशत पदक छात्राओं के पक्ष में गये हैं। नकलविहीन परीक्षा कराने की दृष्टि से उठाये गये कदम सराहनीय थे। इससे छात्रों की संख्या में कमी अवश्य आयी है।लेकिन गुणवत्ता बढ़ी। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा पटरी पर आ गयी है। उच्च शिक्षा में मौलिक परिवर्तन हुये है। सभी सत्र नियमित हुये हैं।
दीक्षान्त समारोह समय पर तथा भारतीय वेशभूषा में सम्पन्न हुये हैं। नकल, फर्जी अंक तालिका एवं उपाधि वितरण की दिशा में ठोस कदम उठाये गए। ई लर्निंग, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार शैक्षिक दिवस, प्रवेश, परीक्षाफल, शिक्षकों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाएं, ई-लाईब्रेरी, अभिलेखों की डिजिटाइजेशन आदि पर भी उल्लेखनीय कार्य हुए है। सत्र दो हजार उन्नीस बाइस में सम्पन्न होने वाले दीक्षान्त समारोह की प्रस्तावित तिथियाँ घोषित कर दी हैं। दीक्षान्त समारोह कैलेण्डर के अनुसार सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह तिरासी दिवसों में सम्पन्न होकर छात्र छात्राओं को उपाधियाँ वितरित हो जायेंगी। दीक्षान्त समारोह पारम्परिक भारतीय वेशभूषा में सम्पन्न होंगे।
गत वर्ष कुल एक सौ सात दिवसों में सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह सम्पन्न हो सके थे।
पांच वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय में शैक्षिक कलैण्डर घोषित न होना, समय से प्रवेश न होना, ससमय परीक्षाएं आयोजित एवं परिणाम घोषित न होना एवं समय से दीक्षान्त समारोह सम्पन्न न होने से छात्र-छात्राओं को समय से उपाधियाँ भी प्राप्त नहीं होती थी जिससे छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने में बाधा आती थी। ये सभी रुकावटें अब दूर हो चुकी है।
विश्वविद्यालय के कैलण्डर को सुव्यवस्थित करने एवं शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए प्रतिवर्ष दो कुलपति सम्मेलन आयोजित किये जाने लगे। इसका ही परिणाम है कि अब विश्वविद्यालयों में समय से प्रवेश हो रहे है तथा परीक्षाएं आयोजित होकर परिणाम भी घोषित हो रहे हैं। सभी विश्वविद्यालयों के दीक्षान्त समारोह भी निश्चित समय सीमा में करने के लिए प्रस्तावित कैलेण्डर घोषित किया गया है।
उच्चशिक्षा के क्षेत्र में आनन्दी बेन को बेहतर व्यवस्था मिल रही है। यह उम्मीद करनी चाहिए कि इस क्षेत्र में जो कमी रह गई है, वह भी दूर होगी। उपमुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ दिनेश शर्मा स्वयं इस कार्य में लगे है। उनका सहयोग भी आनन्दी बेन को मिलेगा।
आनंदबीन पटेल का जन्म उन्नीस सौ इकताली में हुआ था। पैतृक खरोद गांव उनके पिता जेठाभाई शिक्षक थे। उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत शिक्षिका के रूप में कई थी। उन्नीस सौ सत्तासी में वह भाजपा की सदस्य बनी। इसी के साथ उनकी सक्रिय राजनीति शुरू हुई।
उन्नीस सौ सड़सठ से सत्तर तक वह अहमदाबाद के मोहिनिबा कन्या विद्यालय में शिक्षिका रहीं।
बाद में वह यहीं प्राचार्य भी बनी।दो हजार सात में वह पहली बार विधायक बनी। इसके बाद उन्हें मंत्री बनाया गया। लोक निर्माण, भवन और राजस्व मंत्रालय में उन्होंने अनेक उल्लेखीनय काम किये। दो हजार बारह में पुनः विधायक निर्वाचित हुईं। उन्हें पुनः मंत्री बनाया गया। नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात मे वह उनकी उत्तराधिकारी बनी।
वह गुजरात की पंद्रहवीं और पहली महिला मुख्यमंत्री बनी। वह करीब दो वर्ष तक इस पद पर रही। इसके बाद वह मध्यप्रदेश की राज्यपाल बनी थी।
वस्तुतः यह मुकाम उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से हासिल किया था। उस समय प्राथमिक शिक्षा के बाद बालिकाओं को पढ़ाने के प्रति कोई उत्साह नहीं दिखाया जाता था। आनन्दी बेन की शिक्षा के प्रति रुचि देखकर उनके पिता जेठालाल ने उन्हें आगे पढ़ने की अनुमति दी। एनएम हाई स्कूल में वह पढ़ी। यहां मात्र तीन बालिकाएं ही थी। लेकिन आनन्दी बेन इससे हतोत्साहित नहीं हुई। वह तैराकी और एथलीटक में भी निपुण थी। तीन वर्षों तक जिला चैंपियन भी रही। उच्च शिक्षा के बाद नौकरी महिला विकास गृह में की। इसके बाद शिक्षिका बनी थी।
लोक निर्माण, भवन निर्माण, राजस्व, शहरी विकास और शहरी आवास, आपदा प्रबंधन और वित्त आदि के क्षेत्र में नरेंद्र मोदी सरकार ने गुजरात का बहुत विकास किया था। ये मंत्रालय आनन्दी बेन ही संभाल रही थी। जाहिर है कि उन्हें पर्याप्त प्रसाशनिक अनुभव है। मंत्री के रूप में उन्होंने अपनी कुशलता प्रमाणित की है। उनके राज्यपाल बनने से उत्तर प्रदेश को लाभ होगा।






