डॉ दिलीप अग्निहोत्री
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल ने राजभवन में कई अभिनव प्रयोग किये है। उन्होंने पर्यावरण महाकुंभ में बच्चों से पौधा रोपण कराया। उस पर बच्चों के नाम की पट्टिका लगाई गई है। उद्देश्य यह कि पौधे और पर्यावरण से बच्चों का भावनात्मक लगाव हो जाए। बड़े होकर वह पौधे को पेड़ होता हुए देखें। यह प्रयोग राजभवन तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि समाज में बच्चों को इस दिशा में प्रेरणा मिलेगी। इसी प्रकार आनन्दी बेन पटेल ने राजभवन के गांधी सभागार में बच्चों की पाठशाला लगाई। इसमें रक्षाबंधन को राष्ट्ररक्षा की भावना से जोड़ने का सन्देश दिया।उत्तर प्रदेश की जनसंख्या के अनुरूप बाइस करोड़ पौधों का रोपण किया गया। आनंदीबेन पटेल ने स्वयं राजभवन में बरगद का पौधा लगाया। उनकी प्रेरणा से राजभवन परिसर में निवास करने वाले अधिकारी, कर्मचारी व उनके परिजनों द्वारा राज्यपाल के साथ ही अमरूद, आम, आवंला, कचनार, मौलश्री, पीपल, बरगद, हरसिंगार आदि के नब्बे पौधे लगाए। आनंदीबेन पटेल ने वृक्षारोपण महाकुंभ में राजभवन परिसर में रहने वाले परिवार सहभाग का आह्वान किया था।
उन्होंने कहा था कि राजभवन परिसर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बच्चों से वृक्षारोपण कराया जाये। जिससे कि बच्चा स्वयं के बढ़ने के साथ-साथ पौधे को भी विकसित होता देख सके। प्रत्येक बच्चा एक पौधे को गोद लेगा और पौधे के साथ बच्चे के नाम की पट्टिका भी लगाई जाएगी। आगे चलकर उसके लिये भी यादगार रहेगा। भावी पीढ़ी के लिये पर्यावरण और जल के संरक्षण का भाव होना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसीलिये जल विभाग सृजित किया है। पर्यावरण एवं जल संरक्षण में महिलाओं एवं बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उतने ही पानी का उपयोग करना चाहिए, जितनी आवश्यकता हो। लोग आधा पानी पीते हैं आधा छोड़ देते हैं जो बर्बाद होता है। बच्चे भी बड़े काम कर सकते हैं। संतान की भांति पौधों का संवर्धन व संरक्षण करना चाहिए।

कुछ दिन पहले भी आनंदी बेन पटेल ने राजभवन परिसर में रहने वाले कर्मियों के बच्चों की विशिष्ट कार्य सौंपा। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर बच्चे समूह बनाकर सेना के सेन्ट्रल कमाण्ड एवं जेल जाकर वहाँ राखी बांधें। बच्चे सेना के अधिकारियों एवं जवानों को रक्षा सूत्र बांधकर उनका अभिनन्दन करेंगे। उनके बारे में जानेंगे। इसी प्रकार बच्चे जेल में निरूद्ध बंदियों से बातचीत कर उनसे एवं उनके परिवार के बारे में और किये गये जुर्म की जानकारी लेंगे। इससे बच्चों में जीवन में कभी भी गलत कार्य न करने की प्रवृत्ति पर स्वाभाविक रूप से असर पड़ेगा।
राज्यपाल ने कहा कि बच्चे ऐसे स्थानों पर जाकर अध्ययन करेंगे तथा अपने अनुभव लिखकर उन्हें दिखायेंगे। सभी कर्मियों के परिवार का आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उनका उपचार तब तक कराया जाये जब तक वे पूर्णतया स्वस्थ न हो जायें। जरूरत पड़ने पर रोग विशेषज्ञ का भी सहयोग लें। टीबी मुक्त प्रदेश बनाने के लिये अभियान चलाकर इसकी जांच होगी। कुपोषित महिलाओं एवं बच्चों आदि का भी उचित उपचार किया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रोत्साहित करने की दृष्टि से वे भी टी बी से पीड़ित बच्चों को गोद लेंगी। अन्य लोग भी ऐसा कर सकते हैं। राजभवन में कार्यरत रूपये पांच लाख वार्षिक से कम आय वाले कर्मचारियों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत कार्ड बनाकर दिये जाएंगे। महिलाएं, बच्चे और सभी कुपोषण मुक्त हों, इसके लिये पूरे प्रदेश में अभियान चलाने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योग को वैश्विक मान्यता दिलाई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संयुक्त राष्ट्र संघ ने इक्कीस जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया है। राजभवन में नियमित रूप से योग करने के लिये प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाएगा। बालिकाओं तथा महिलाओं के लिये महिला योगाचार्य की व्यवस्था की जाएगी। बच्चों एवं महिलाओं की रूचि के अनुसार उन्हें गायन एवं चित्रकला का प्रशिक्षण दिया जायेगा। छोटे छोटे स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आय के स्रोत बढ़ाये जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश राजभवन की महिलाओं ने अच्छी राखियाँ बनाई। उन्होंने चार सौ राखियाँ खरीदी हैं। बच्चों के व्यक्तिगत विकास के लिये उनकी रूचि का ध्यान रखना चहिए। हर बच्चे में अलग तरह की विशेषता होती है। अभिभावक उस विशेषता को पहचान कर बच्चों को अवसर उपलब्ध करायें।
राजभवन में ओपन जिम की व्यवस्था की जायेगी। बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिये राजभवन में ऐसे लोगों को आमंत्रित किया जायेगा जो किसी विषय के विशेषज्ञ को आमंत्रित कराया जाएगा। उनसे प्रेरणा प्राप्त करके बच्चे आगे बढेंगे। इस प्रकार आनंदीबेन पटेल ने राज भवन में बच्चों को विशिष्ट बनने की प्रेरणा दी।






