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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    भारत की कूटनीति से घिरेंगे पाक और चीन

    By August 19, 2019 Current Issues 1 Comment7 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    भूटान बहुत छोटा देश है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पड़ोसी देशों से संबन्ध बेहतर रखने के मामले में उसे भी पूरा महत्व दिया। यह भारत की सहयोगी विदेश नीति है, जिसमें किसी देश को अपनी विशालता के दम पर उपेक्षित रखने का भाव नहीं होता। पाकिस्तान की बात अलग है। नरेंद्र मोदी ने प्रारंभ में पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर रखने के प्रयास किये थे, लेकिन यह मुल्क अपनी आतंकी फितरत छोड़ नहीं सका। ऐसे में उससे निपटने के लिए अलग रणनीति बनानी पड़ी। जबकि अन्य पड़ोसी देशों के साथ नरेंद्र मोदी लगता सहयोग बढ़ाने का प्रयास करते है।
    उनके दूसरे कार्यकाल के अभी मात्र दस महीने ही हुए है। इस अल्प अवधि में वह मालद्वीप और श्रीलंका की यात्रा कर चुके है। इसके बाद उन्होंने भूटान जाने का निश्चय किया था। इसके पहले नरेंद्र मोदी ने आतंकी पाकिस्तान को छोड़कर सभी पड़ोसी देशों को नई दिल्ली आमंत्रित किया था। इन सभी देशों के शासकों ने अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराई थी। अभी स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने इन पड़ोसी देशों का नाम भी लिया था, यह भी कहा था कि आतंकवाद के मुकाबले में भारत अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करेगा।
    इसके बाद ही प्रधानमंत्री भूटान यात्रा पर गए थे। वर्तमान परिस्थियों के कारण इस यात्रा का महत्व बढ़ गया था। भारत ने अभी अपने संविधान में संशोधन करके अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को हटा दिया था। भारत संप्रभु राष्ट्र है। अपने संविधान में संशोधन करने के लिए उसे निर्बाध अधिकार है। किसी अन्य देश को इस पर बोलने का अधिकार नहीं है। लेकिन पाकिस्तान ने इसे भी मुद्दा बनाने का प्रयास किया। चीन उंसकी सहायता को तैयार रहता है।
    ऐसे में मोदी की भूटान यात्रा को इस संदर्भ में भी देखना होगा। चीन पिछले कुछ समय से भूटान में सहयोग के नाम पर अपनी जड़ें जमाने का प्रयास करता रहा है। ऐसे में भारत को इसे चीन के चंगुल से बचाने का प्रयास करना था। नरेंद्र मोदी ने भूटान जाकर दोहरा लक्ष्य हासिल किया है। एक तो भूटान और भारत के बीच सहयोग बढा, दोनों के संबन्ध मजबूत हुए। दूसरा लक्ष्य यह कि भूटान में चीन के हस्तक्षेप को रोकने में सफलता मिली है। दोनों देशों के बीच हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट, नॉलेज नेटवर्क, मल्टी स्पेशलिएटी हॉस्पिटल, स्पेस सैटेलाइट, रूपे कार्ड सहित नौ समझौते पर हुए।
    नरेंद्र मोदी और भूटान के प्रधानमंत्री डॉ. लोते शेरिंग के बीच उपयोगी वार्ता हुई। भारतीय समुदाय के साथ मोदी का संवाद हुआ। मोदी ने यहां के विद्यार्थियों सहित अन्य सभी लोगों को प्रभावित किया। स्वास्थ जीवन की प्रमुख आवश्यकता होती है। मोदी ने यहां के लोगों से केवल यह बात साझा ही नहीं की, बल्कि भारत की ओर से स्वास्थ्य व आयुष की सौगात भी दी। उन्होंने कहा कि भारत मल्टी स्पेशलिटीहॉस्पिटल तैयार करने में भूटान की सहायता करेगा।जिससे यहां के लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा, उन्हें अन्य स्थानों पर दौड़ना नहीं पड़ेगा।
    मोदी ने विश्वास दिलाया कि अब भूटान तकनीक के मामले में भी पीछे नहीं रहेगा। स्पेस टेक्नोलॉजी के माध्यम से भारत अब  भूटान के विकास में सहयोग देगा। दोनों देश छोटे उपग्रह तैयार करेंगे। रॉयल भूटान यूनिवर्सिटी और भारत के आईआईटी को साथ मिलकर तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने यहां पांच परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। इसमें इसरो के ग्राउंड स्टेशन, मेंगदेछू पनबिजली परियोजना शामिल है। नरेंद्र मोदी ने भारतीय रूपे कार्ड को भी लॉन्च किया। इससे पहले रूपे कार्ड सिंगापुर में भी लॉन्च किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि भूटान के साथ बातचीत सार्थक रही। इससे दोनों देशों की मित्रता और मजबूत हुई है। भारत अपने पड़ोसी भूटान के साथ संबंधों को बहुत महत्व देता है। इसका प्रमाण है कि पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सबसे पहले भूटान यात्रा पर आए थे। इस बार भी दस हफ्ते की भीतर ही वह भूटान पहुंचे थे।
     नरेंद्र मोदी ने भूटान में छात्रों को संबोधित किया। उनके संबोद्धन से छात्र बहुत प्रभावित हुए। इसका कारण था कि मोदी का भाषण किसी दूसरे देश के प्रधानमंत्री जैसा नहीं था, बल्कि वह एक अभिभावक के रूप में बोल रहे थे। जो विद्यर्थियो का कल्याण चाहता है। मोदी ने उन्हें आगे बढ़ने, नेतृत्व के लिए अपने को तैयार करने की प्रेरणा दी। बताया कि भारत नए दौर से गुजर रहा है। यहां अनेक सुधार लागू किये गए है। भूटान के छात्र यहां शिक्षा ग्रहण करने आ सकता है।
    यह भी कहा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों व सहयोग बढ़ाने पर सार्थक बातचीत हुई है। इस यात्रा से भूटान के साथ भारत की  मित्रता और मजबूत होगी, जिससे दोनों देशों के बीच समृद्धि और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा। भारत की पड़ोसी पहले की नीति रही है। मोदी की भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, पूर्व नरेश जिग्मे सिग्मे वांगचुक और प्रधानमंत्री लोतेशेरिंग के साथ उपयोगी वार्ता हुई।
    मोदी ने यहां के आमजन को राहत पहुंचाने वाली सौगात भी दी। एलपीजी की आपूर्ति सात सौ टन मासिक से बढ़ाकर एक हजार टन मासिक कर दी। विदेशी मुद्रा की जरूरत भी पूरी की जाएगी। वर्तमान स्टैंड बाय स्वेप अरेंजमेंट में दस करोड़ रुपये की अलग व्यवस्था की गई। भूटान में जल विद्युत की बहुत संभावना है। मोदी ने पांच वर्ष पहले भूटान यात्रा में इस तथ्य को समझा था। इस बार मागेंडेछु जल विद्युत परियोजना का उद्घाटन भी हो गया। इससे भूटान की बिजली व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी। जाहिर है कि नरेंद्र मोदी की यह यात्रा केवल औपचारिक ही नहीं थी, बल्कि इसमें उन्होंने भूटान के आमजन के विश्वास भी हासिल किया है।
     रॉयल यूनिवर्सिट में नरेंद्र मोदी के भाषण से विद्यार्थी बहुत प्रभावित हुए। यहां मोदी ने कहा कि यह खुशी की बात है कि भूटान के युवा वैज्ञानिक  छोटे उपग्रह को डिजाइन करने और लॉन्च करने के लिए भारत की यात्रा करेंगे।  किसी दिन जल्द ही इनमें से कई वैज्ञानिक, इंजीनियर और निवेशक होंगे। भूटान के वैज्ञानिक भी सेटेलाइट बनाएंगे। दक्षिण एशियाई उपग्रह के थिंपू ग्राउंड स्टेशन के उद्घाटन से अंतरिक्ष सहयोग का विस्तार हुअ है। उपग्रहों के जरिए टेली मेडिसिन का लाभ, दूरस्थ शिक्षा, मानचित्रण, मौसम पूर्वानुमान, प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी आदि सुनिश्चित होगी। भारत आज तमाम सेक्टर में ऐतिहासिक परिवर्तनों का गवाह बन रहा है। पिछले पांच साल में बुनियादी ढांचे के निर्माण की रफ्तार दोगुनी हो गई है।
    गरीबी उन्मूलन के लिए भारत में तेजी से काम चल रहा है। भारत और भूटान की साझा संस्कृति है। अब अवसरों की कमी नहीं है। भारत और भूटान के लोगों में जबर्दस्त जुड़ाव है। नरेंद्र मोदी ने अभिभावक के रूप में कहा कि परीक्षा को लेकर कतई तनाव न लें। अपनी लिखी पुस्तक एग्जाम वॉरियर्स की भी चर्चा की। कहा कि यह पुस्तक बुद्ध की शिक्षा से प्रेरित होकर उन्होंने लिखी थी।
    दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी किया। इस अवसर पर मोदी ने कहा था कि दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में भूटान आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। भूटान उनका पड़ोसी है, यह उनका सौभाग्य है। दोनों देश मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। इसरो भूटान की राजधानी थिम्पू में अर्थ स्टेशन बनाएगा। बिजली खरीद, विमान हादसे और दुर्घटना की जांच, न्यायिक शिक्षा, अकादमिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विधिक शिक्षा और शोध के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाया जाएगा।
    नरेंद्र मोदी ने पड़ोसी देश की यात्रा को सफल बताया। यात्रा से द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री ने ट्वीट के माध्यम से यात्रा के दौरान गर्मजोशी से स्वागत और आतिथ्य के लिए भूटान की जनता एवं सरकार का धन्यवाद किया। यह एक यादगार यात्रा थी। इस अद्भुत देश के लोगों से मुझे जो स्नेह मिला है, उसे कभी नहीं भुलाया जा सकता। ऐसे कई कार्यक्रम थे जिनमें मुझे हिस्सा लेने का सम्मान मिला था। इस यात्रा के परिणाम स्वरूप द्विपक्षीय संबंधों में और मजबूती आएगी।

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