लज्जा और इज्जत छोड़ मानवता का ख्याल रखा
बिहार के बुंडू की दो दिन पहले की घटना है। तारकेश्वरी देवी एवं अनिता देवी परस्पर भाभी-ननद अपने खेत में काम कर रही थीं। काम के दौरान इन्होंने गांव के ही बुधराम को पानी में बहते देखा तो अपना काम छोड़ बहते बुधराम के पीछे दौड़ीं। बुधराम बहे जा रहा था, समय कम था, जान बचाने के लिए इज्जत की परवाह नहीं कर दोनों ने अपनी साड़ियों से बुधराम की जान बचायी। ननद तारकेश्वरी देवी एवं भाभी अनिता देवी ने बताया कि बुधराम बह रहा था। मौत उसके सामने खड़ी थी। अनिता ने फोनकर गांव वालों को सूचना दी लेकिन उनके पहुंचने तक काफी देर हो जाती। तारकेश्वरी ने पहले साहस का परिचय देते हुए अपनी साड़ी खोल उसमें पत्थर बांध उसे डूबते बुधराम की ओर उछाल दिया । लेकिन एक साड़ी छोटी पड़ गई तो अनिता ने भी अपनी साड़ी खोल दी और बुधराम की जान बचाई । ननद तारकेश्वरी देवी सातवीं पास हैं जबकि अनिता देवी हिंदी में एमए करने के बाद पीएचडी कर रहीं हैं।

अनिता देवी… तारकेश्वरी देवी…. बुधराम







