छठ पूजा पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख पर्व है। इसमें अस्त होते सूर्य के बाद उदय होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पूजा पद्धति की विविधता हिन्दू धर्म की उदार विशेषता है। लेकिन मोलभाव समान है। उपासना अंततः परम सत्ता से मिलने का माध्यम है। इसी लिए मोक्ष को परम पुरुषार्थ कहा गया। इन्हीं माध्यमों में ही विविधता है। प्रसिद्ध लेखक अज्ञेय ने ठीक लिखा था कि हिन्दू धर्म ने अपने अनुयायियों के लिए कोई बाड़ा नहीं बनाया। इसमें निर्गुण, सगुण, अनीश्वरवादी, एकेश्वरवादी, बहुदेववादी, सभी हिन्दू है। प्रकृति, चन्द्र,सूर्य,पृथ्वी,
बृक्ष,पर्वत, नदी सभी हमारे लिए पूज्य है।

कुछ दिन पहले चन्द्र पूजन का करवाचौथ मनाया गया। चंद्रमा मन का देवता है। कामना की गई कि पति पत्नी के मन ठीक रहें तो गृहस्थी में शांति रहती है। फिर प्रकृति प्रेम की गोवर्धन पूजा, छठ पूजा मनाई गई। सूर्य का भी हमारे जीवन व ज्योतिष शास्त्र में महिमा बताई गई। इन्हें प्रत्यक्ष देवता बताया गया। भारत के अन्य सभी क्षेत्रों में ऐसी विविधता वाले पर्व मनाए जाते है।
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अलग अलग पर्व मनाने के बाद भी हमको अन्य सभी का सम्मान करना चाहिए। ये सभी मिलकर हिन्दू धर्म को सुंदर व अद्वितीय बनाते है। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित बड़ी संख्या में लोगों ने सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा मनाई।
- डॉ दिलीप अग्निहोत्री







