तिब्बती भाषा-धर्म पर सख्ती, शिक्षा में मंदारिन थोपने का आरोप
नई दिल्ली : तिब्बती केंद्र मानवाधिकार और लोकतंत्र (TCHRD) ने दो नई रिपोर्ट जारी कर चीन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार वर्ष 2025 में तिब्बत में मानवाधिकार हनन बढ़ा है और चीन ने इस क्षेत्र पर अपना राजनीतिक व वैचारिक नियंत्रण और मजबूत कर लिया है।
चीनी नीतियों का तिब्बती संस्कृति पर हमला
TCHRD की वार्षिक रिपोर्ट “तिब्बत में मानवाधिकार स्थिति 2025” और “धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट (2012-2025)” में कहा गया है कि चीन की दमनकारी नीतियां तिब्बती लोगों की सांस्कृतिक, धार्मिक और नागरिक स्वतंत्रता के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं। बीते एक साल में दमन की घटनाएं बढ़ी हैं।
भाषा पर सबसे बड़ा संकट
चीनी अधिकारियों द्वारा हाल में लागू किए गए शिक्षा कानून के तहत प्रारंभिक शिक्षा में पुतोंगहुआ (मंदारिन) भाषा को अनिवार्य प्राथमिकता दी जा रही है। इससे तिब्बती भाषा शिक्षा हाशिए पर चली गई है।
TCHRD की कार्यकारी निदेशक तेनजिन दावा ने कहा कि यह नीति तिब्बती भाषा और संस्कृति को भावी पीढ़ियों तक पहुंचने से रोकने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।
रिपोर्ट के खास बात :
- तिब्बत पर चीन का नियंत्रण और सख्त हुआ
- राजनीतिक व वैचारिक दमन बढ़ा
- धार्मिक स्वतंत्रता पर लगातार हमले
- मंदारिन भाषा को बढ़ावा देकर तिब्बती पहचान को कमजोर करने की कोशिश
TCHRD की रिपोर्ट्स एक बार फिर दावा कर रही हैं कि चीन तिब्बत को पूरी तरह अपनी संस्कृति में समाहित करने की कोशिश में लगा है, जिससे तिब्बती भाषा, धर्म और पहचान गंभीर संकट में है। यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिब्बत मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला सकती है।







