संगीत नाटक अकादमी में हुई तबला वादक पं.शीतलप्रसाद मिश्र की रिकाॅर्डिंग
लखनऊ, 16 दिसम्बर 2019: पहले के गुरुजन या उस्ताद जब शिष्यों से प्रसन्न होते थे तो उन्हें विलक्षण बंदिशे सिखाते थे, पर मैंने कभी अपने शिष्यों से भेदभाव नहीं किया। पहले के गुरु भले ही कट्टर रहे हों पर मैंने कभी सिखाने में भेदभाव नहीं बरता, ये मुझे संगीत के साथ बेइमानी लगती है।
विभिन्न तबला घरानों की विशेषताओं का उल्लेख दिलचस्प संस्मरणों के साथ करते हुए ये बात बनारस घराने के विख्यात तबलावादक पं.शीतलप्रसाद मिश्र ने संस्कृतिकर्मी अनूप मिश्र को सवालों का जवाब देते हुये बतायीं। गोमतीनगर स्थित उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी ने आज अपने स्टूडियो में अभिलेखागार के लिये उनकी रिकार्डिंग करायी।
बिहार में पैदा और शिक्षित हुए पं.शीतलप्रसाद ने बनारस घराने के तबला उस्तादों से वादन सीखा। केजी गिण्डे, असगरी बेगम जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ बजाने वाले पं.शीतलप्रसाद एक लम्बे अरसे तक भातखण्डे संगीत संस्थान में षिक्षक के तौर पर सेवायें दे चुके हैं।
त्रिपल्ली, फर्द, गत के संग ही बढ़इया जैसी दुर्लभ बंदिशों में बताने के साथ ही पं.शीतलप्रसाद ने दिल्ली, लखनऊ, बनारस, अजराड़ा, फरुर्खाबाद के तबला घरानों के बारे में गुरुओं से सुनी हुई बात बताने के साथ इन घरानों की विशेषताएं भी बताईं।






