जी के चक्रवर्ती
अभी हाल ही में केंद्र की सत्तासीन सरकार ने देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को यानी पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) एक भारतीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली लागू की है। जो वर्ष 1997 में वस्तुओं, के मुख्यतः भोजन साम्रगी में अनाज, गेहूं, चावल, चीनी, और मिट्टी का तेल इत्यादि को उचित मूल्य की दुकानों ( जिन्हें राशन की दुकानों के रूप में भी जाना जाता है।) के एक नेटवर्क जो देश भर में कई राज्यों में स्थापित है उसके माध्यम से वितरित किया जा रहा है।
इस व्यवस्था को एक नया रूप देने के साथ ही एक तरह से देश को आर्थिक रूप से एक सूत्र में पिरोने जैसा उद्देश्य इसमें शामिल है। वहीं पर देश मे जीएसटी एवं वन रैंक वन पेंशन के बाद एक देश-एक राशन कार्ड की परिकल्पना जैसे योजनाओं को साकार रुप दिये जाने के काम में सत्तासीन सरकार प्रयासरत है। इस योजना के तहत लाभार्थी एक ही राशन कार्ड से सम्पूर्ण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सम्पूर्ण राष्ट्र में किसी भी राज्य के किसी भी स्थान पर की उचित दर की दुकान से अपने कोटे के अनाज ले सकता हैं।
अभी मौजूदा समय मे पूरे देश भर के 12 प्रांतों में एक देश-एक राशन कार्ड की योजना शुरू कर दी गयी है। इस योजना को सम्पूर्ण देश में लागू करने के लिए पहली जून वर्ष 2020 की समय सीमा तय की गई है लेकिन आगामी 30 जून 2020 तक देश के सभी राज्यों को इससे जोड़ने का लक्ष्य को पूरा कर लेने की आशा है। वही पर यदि हम वर्तमान समय में अभी तक चली रही कोटा प्रथा में कोटेदारों की मनमानी की बात करें तो उसमें पूर्णतः रोक लगने के साथ उनके भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगना तय है। इस योजना के सम्पूर्ण देश मे लागू हो जाने के बाद इसका सबसे ज्यादा फायदा एक स्थान से दूसरे स्थान पर अपने जीवन निर्वाह करने के उद्देश्य से अपनी जीविकोपार्जन के लिये स्थानांतरित होने वाले गरीबों लोगों को विशेषतः प्रवासी मजदूरों को मिलेगा।
एक रिपोर्ट के अनुसार उचित दर की दुकाने ही अब तक इसमे होते रहे भ्रष्टाचारों के लिए प्रमुख्यतः जिम्मेदार हैं। यहां पर जनता को ठगने के लिए दुकान मालिक, ट्रांसपोर्टर, नौकरशाहों एवं नेताओं के मध्य आपस में साठगांठ करके खाद्यान्नों की कालाबाजारी करने में लिप्त रहते थे, जिससे इस योजना का लाभ आम जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच पाता था। ऐसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने वर्ष 2014 से ही राशन कार्डों का डिजिटलीकरण का काम बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया था जो कि अब लगभग पूरा हो चुका है। इतना ही नहीं 90 प्रतिशत तक के राशन कार्डों को उनके धारकों के आधार नंबर से भी जोड़े जा चुके हैैं। अभी तक जिन प्रांतों में उचित दर की दुकानें शत प्रतिशत ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक विक्रय केंद्र उपकरण से जोड़े जा चुके हैं वहां के पीडीएस लाभार्थी अब चाहे देश के किसी भी प्रदेश में कियू न निवास कर रहे हों लेकिन अपने मौजूदा राशन कार्ड से ही अपने हिस्से का अनाज प्राप्त कर सकते हैं।
देश के कोई भी पीडीएस के लाभार्थी खाद्यान्न पाने से वंचित न रह जायें इसके लिए राशन की दुकानदारों को हाइब्रिड मॉडल की प्वाइंट ऑफ सेल मशीनें दी गई हैं। जिससे यह मशीनें ऑनलाइन स्थीति के साथ ही साथ ऑफलाइन अवस्था मे भी काम करने में पूर्णतः सक्षम है







