- नेताओं को लग रहा, अगले चुनाव में भाजपा को सपा ही दे सकती है टक्कर
- लगातार सपा छोड़कर बसपा में जाने का सिलसिला जारी है
उपेन्द्र नाथ राय
लोकसभा चुनाव के दौरान जब सपा और बसपा का गठबंधन हुआ तो ऐसी हवा चलाने की कोशिश हुई कि बुआ-बबुआ की जोड़ी के आगे भाजपा हवा में उड़ जाएगी लेकिन ऐसा न होने पर चुनाव बाद ही बसपा ने सपा को झटक दिया। उसके बाद से ही बसपा प्रमुख हमेशा सपा पर हमलावर रहीं लेकिन अखिलेश यादव ने बसपा के खिलाफ जुबान नहीं खोली। अब एक-एक कर बसपा के लोगों का साइकिल की सवारी करना बता रहा है कि सपा ने मौनव्रत रहकर बसपा को खोखला करने की ठान ली है। इससे बसपा प्रमुख मायावती की बौखलाहट बढ़ेगी।
राजनीति के जानकार बसपा नेताओं का सपा में शामिल होने का एक महत्वपूर्ण कारण आने वाले विधानसभा चुनाव में अब तक भाजपा को टक्कर देने वाली पार्टी के रूप में सपा के ही होने की संभावना बता रहे हैं। पहली बार यूपी के विधानसभा उपचुनाव में भाग्य आजमाने वाली बसपा को जब शुन्य पर सीमटना पड़ा तो बसपा प्रमुख मायावती भी सन्न रह गयी थीं। उनको ऐसा होने का कत्तई एहसास नहीं था। अभी लोकसभा चुनाव में हार के बाद सपा से गठबंधन तोड़कर खुद को दूसरे नम्बर की पार्टी बनने की फिराक में उन्होंने उपचुनाव में अपने उम्मीदवारों को उतारने का फैसला किया।

गठबंधन तोड़ते ही हमलावर हो गयीं मायावती, अखिलेश रहे मौन:
सपा के साथ गठबंधन तोड़ने के बाद ही उसपर हमलावर मुद्रा में भी आ गयी थीं और उन्होंने कहा था कि लोकसभा में अखिलेश यादव के कहने पर ही उन्होंने मुसलमानों को कम टिकट दिया था। इन सबके बावजूद उपचुनाव में उनका खाता नहीं खुला। इसके बाद से ही लोग अनुमान लगाने लगे कि आने वाले चुनाव में भी सपा ही भाजपा को टक्कर दे सकती है।
सीएए के विराेध में भी अव्वल हैं अखिलेश:
दूसरी ओर सीएए के विरोध में भी प्रदेश में मुखर विरोध करने में सपा बसपा की अपेक्षा आगे रही। इससे एक वर्ग का झुकाव उसकी तरफ ज्यादा बढ़ा है। कांग्रेस ने भी सीएए को विरोध किया लेकिन वह प्रदेश में अस्तिवहीन है। इस कारण उसकी तरफ नेताओं का ध्यान कम है। यही कारण है कि अब बसपा में भगदड़ सी मच गयी है और आए दिन बसपा छोड़कर नेता सपा में शामिल हो रहे हैं। इससे जहां एक तरफ सपाइयों में उत्साह दिख रहा है, वहीं बसपा में मायूसी है।
राजनीतिक भविष्य सपा में सुरक्षित लग रहा नेताओं को:
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यही कारण है कि सोमवार को बहुजन समाज पार्टी से निष्कासित पूर्व सांसद तथा मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री राम प्रसाद चौधरी ने दो दर्जन से अधिक समर्थकों के साथ यहां समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। बस्ती के रहने वाले है पूर्व सांसद व विधायक राम प्रसाद चौधरी के साथ ही आठ पूर्व विधायक और एक पूर्व सांसद ने भी सपा का दामन थामा। छह जिलापंचायत सदस्य और कई पूर्व जिला पंचायत सदस्य भी शामिल हुए। इससे पूर्व शनिवार को बसपा सरकार में मंत्री रहे डॉ. रघुनाथ प्रसाद शंखवार, मोहनलालगंज से प्रत्याशी रहे सीएल वर्मा सहित विभिन्न दलों के प्रमुख नेताओं समेत सैकड़ों लोग सपा में शामिल हुए थे।







