बोडो अलगाववादी संगठनों के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर
भारत सरकार, असम सरकार और अलगाववादी बोडो आंदोलनकारी घटकों के बीच सोमवार को एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए। गृह मंत्रालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद पत्रकारों के समक्ष सभी संबंधित पक्षों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश की एकता-अखंडता और विशेषकर असम में शांति बहाली के लिए आज का दिन-ऐतिहासिक कहा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अलगाववादी बोडो संगठनों के साथ सन् 2003 में एक शांति समझौता हुआ था, पर उसमें कुछ संगठन सहभागी नहीं हुए थे। इस बार बोडो आंदोलन से जुड़े सभी धड़े इस शांति प्रक्रिया में शामिल हुए और जो समझौता हुआ है वह सर्वसम्मत है।
असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल. उत्तर पर्व विकास आयोग के अध्यक्ष हेमंता बिस्वशर्मा, केन्द्रीय गृह सचिव ए के भल्ला, खुफिया ब्यूरो (आई बी) के निदेशक अरविंद कुमार, असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण की मौजूदगी में गृह मंत्रालय में सुबह से ही चल रही बैठक के बाद ऑल बोडो स्टूडेन्टस यूनियन (आबसू) और नेशनल डेमोक्रेटिक फंड ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के सभी धड़े समझौते पर सहमत हुए।
इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि अलग बोडोलैंड की बात पूरी तरह से समाप्त हो गई है। इसके स्थान पर बोड़ो टेरिटोरियल काउंसिल को और सशक्त व अधिकार सम्पन्न बनाने पर सहमति हुई है। इसके लिए एक कमेटी बनाने पर भी सभी पक्ष सहमत हुए हैं जो न केवल इस समझौते को लागू कराएगा बल्कि बोड़ो क्षेत्र के पुनर्गठन का भी कार्य करेगा।






