शक के आधार पर ईरान पर हमला कर फंसे ट्रंप,अब निकलना पड़ा रहा है भारी
ओम माथुर
अदालत में मुकदमे की सुनवाई चल रही थी। जज ने आरोपी से पूछा, उसने अपने पड़ोसी का खून क्यों कर दिया। आरोपी ने कहा, उसे ऐसा पता चला था कि अगर वह पड़ोसी का खून नहीं करता, तो पड़ोसी उसका खून कर देता। जज ने पूछा उसे ऐसा क्यों लगा,तो उसने जवाब दिया कि उसके दूसरे पड़ोसियों और दोस्तों ने उसे ऐसा बताया था।
ठीक ऐसा ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। उन्हें यह शक था कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला नहीं किया, तो ईरान जल्द हमला कर देगा। उन्हें कुछ अधिकारियों ने इसके तथ्य दिए थे। लेकिन वो तथ्य क्या थे, इसकी जानकारी ट्रंप ने नहीं दी। अब बताएं, उसे मूर्ख पड़ोसी और ट्रंप में क्या ज्यादा अंतर है। जिस युद्ध में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। जिसके कारण करीब 100 से अधिक देश तेल और गैस संकट का सामना कर रहे हो। जिस युद्ध में हजारों निर्दोष लोग मारे गए हो,उस हमले का करने का आधार महज ट्रंप का शक था।
अमेरिका ने ईरान को फ्लावर समझकर हमला किया था, लेकिन वह फायर निकला। उसने युद्ध में अमेरिका और इजराइल को कड़ा मुकाबला दिया। कई बार तो ऐसा लगा कि ईरान से ज्यादा अमेरिका इस युद्ध से बाहर निकलना चाहता है। पहले दो सप्ताह का सीजफायर और उसके बाद ईरान के शांति वार्ता में शामिल नहीं होने का अड़ियल रवैया अपनाने के बाद भी ट्रंप ने सीजफायर बढ़ा दिया है। जबकि ईरान शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान में अपना डेलिगेशन भेजने से इनकार कर चुका था। उसके बाद ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जीडी वैंस की यात्रा टाली गई। अब ट्रंप की अच्छी तरह समझ में आ गया है कि युद्ध में ईरान पर पार पाना इतना आसान नहीं है।
अमेरिका ने जिन तीन उद्देश्यों को लेकर ईरान पर हमला किया था, वो थे ईरान में सत्ता परिवर्तन,ईरान के तेल भंडार और संवद्धित यूरेनियम को अपने कब्जे में करना था। लेकिन इसमें से वह एक भी उद्देश्य को पूरा नहीं कर सका। उलटा जिन अरब देशों को अमेरिका की सुरक्षा पर यकीन था, उसे भी ईरान ने हिलाकर रख दिया है। जिन अरब देशों में अमेरिकी सैनिक अड्डे थे,वहां ईरान ने मिसाइल और ड्रोन बरसाकर उन्हें भी अपनी ताकत का अहसास करा दिया। इस युद्ध में होर्मुन स्ट्रेट ईरान के लिए तुरूप का पत्ता बन गया। उसने युद्ध शुरू होते ही होर्मुज पर कब्जा कर दुनिया भर को तेल और गैस के संकट में डाल दिया। होर्मुज का महत्व समझ में आने पर अमेरिका ने इसकी नाकाबंदी करके ईरान से जाने वाले तेल गैस को भी रोक दिया। जबकि पहले ट्रंप कहते रहे हैं कि होर्मुज से अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है। उसकी सुरक्षा वही देश करें, जहां से उनके लिए तेल और गैस जाता है।
उधर, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका होर्मुज की नाकाबंदी नहीं हटाएगा, तब तक शांति वार्ता का कोई मतलब नहीं है। लेकिन अमेरिका ने इससे साफ इंकार कर दिया है। यानी अब इस युद्ध का केंद्र होर्मुज बन गया है। वहां ईरान के जहाज को अमेरिका द्वारा सीज करने और दो भारतीय जहाजों सहित कुछ जहाजों पर गोलीबारी भी हो चुकी है। ईरान ने पूरे हार्मोन में माइंस भी बिछा रखी है यानी अगर जहाज उसकी इजाजत बिना गुजरे तो वह विस्फोट से उन्हें उड़ा भी सकता है। यानि अब शांति वार्ता सफल नहीं होती है, तो अगला युद्ध आसमान की जगह समुद्र में होगा।
एक और तो ट्रंप ने शक के आधार पर इस युद्ध को शुरू किया। दूसरी ओर वह उस पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाकर आगे बढ़ रहा है, जिसकी दुनिया भर में कोई विश्वसनीयता ही नहीं है। सीजफायर के पहले दौर में शर्तों को लेकर विवाद हो चुका है और आरोप लगा था कि पाकिस्तान ने ईरान को भुलावे में रखा।पाकिस्तान दोनों देशों के बीच शांति वार्ता कराकर चैंपियन बनना चाहता है। लेकिन फिलहाल उसकी बार-बार खिल्ली उड़ रही है । फिलहाल दोनों देश शांति वार्ता की ओर बढ़ते हुए नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका जहां शांति वार्ता नहीं होने पर भीषण हमले करने की धमकी दे रहा है, तो ईरान की आईजीसी में भी हमले का जोरदार जवाब देने की चेतावनी दे दी है उसने भी कहा है कि दो हफ्तों के युद्ध विराम के दौरान ईरान ने फिर मजबूती हासिल कर ली है।







