जी के चक्रवर्ती
आगामी 24 फरवरी को हमारे देश में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत यात्रा पर आने की खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर यह संदेश दिया कि दोनों देश आपसी संबंधों में और भी ज्यादा मजबूती और नजदीकियां बढ़ाने के लिये तत्पर हैं वहीं दोनो देशों के बीच असहमति वाले कुछ मामलों को सुलझाने के लिये वे पहले से कहीं और ज्यादा एक दूसरे के नजदिक आ गये हैं। फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति एक ऐसे वक्त भारत के दौरे पर आ रहे हैं, जब उन्ही के देश मे उन पर लगे महाभियोग से वे अभी अभी बरी हुये हैं जिसकी वजह से उनका दोबारा से राष्ट्रपति चुने जाने की संभावना भी प्रबल हो गयी है इसलिए यह बात तो निश्चित है कि भारत और अमेरिका के बीच दोस्ती परवान चढ़ने वाली है जिससे अमेरिकी नजरिये में भारत की अहमियत पहले से कही और अधिक बढ़ जाने के साथ ही पूरी दुनिया में भी यह संदेश जायेगा कि दोनो देशों के बीच कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के और नागरिकता संशोधन जैसे कानून बनने को लेकर उनके मध्य कोई मतभेद नही है बल्कि वे भारत के पक्ष में है ऐसा संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाने से जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय मीडिया भारत के प्रति दुराग्रह से पीड़ित होने के अलावा दुनिया के कुछ अन्य देश भी भारत की आलोचना करने में अब तक लगे हुए थे उन्हें इस बात से करारा झटका लगेगा।

यह कहना तो मुश्किल है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा से आलोचकों के सुर में कितना बड़ा बदलाव ला पायेगा लेकिन यह तो निश्चित है कि विश्व समुदाय इस बात से और भी अच्छी तरह वाकिफ़ हो जायेगा कि मौजूदा समय के भारतीय प्रधानमंत्री के रहते भारत को कम से कम उसके आतंरिक मामलों में दबाव में नहीं लिया जा सकता है।
इस बात की पुष्टिकरण के लिये उदाहरण स्वरूप यदि हम कश्मीर के मामले को लेकर देखें तो पाकिस्तान और भारत के बीच मध्यस्थता के सवाल पर अमेरिकी राष्ट्रपति का दोटूक यह कहना है कि यह तभी संभव हो सकता है जब भारत स्वमं चाहेगा और वे यह भी जानते हैं कि भारत ऐसा कभी नहीं चाहेगा।
वैसे यदि हम गौर करें तो सितम्बर वर्ष 2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति के भाषण मंच पर पहली बार प्रेसिडेंशियल सील की जगह भारत-यूएस की दोस्ती का झंडा लहरा रहा था, उस वक्त से अमेरिका भारत को विशेष अहमियत देता चला आ रहा है, लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश नीतियों के मामले में जितनी सक्रियता एवं स्पस्टता दिखाई है इससे पहले की सरकारों में वह प्रतिबद्धता दिखायी नही देती थी। जिसकी वजह से हमारे देश को लाभ मिला है। नरेंद्र मोदी ने विदेश नीति के मोर्चे पर अपने कठोर फैसले से उसको और भी ज्यादा कारगर सिद्ध करने का काम किया है।
इसमे किसी तरह की संदेह नही है कि ट्रंप विल्कुल अलग तरह के मिजाज रखने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं, लेकिन इसमे भी कोई संशय नही है कि वे भारतीय प्रधानमंत्री के भी मिजाज से भी भली-भांति अवगत हो चुके हैं। उनका दौरा मात्र इस लिए ही महत्वपूर्ण नहीं होगा कि उन्होंने अपने भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कौन-कौन से समझौते किये हैं, बल्कि इसके स्थान पर दोनो देशों के आपसी मामलों के साथ अंतरराष्ट्रीय जैसे महत्व पूर्ण मुद्दों पर अधिक समझदारी एवं सुझबूझ के साथ आगे भी बढ़ते रहेंगे। जिससे सम्पूर्ण दुनिया को यह संदेश प्रसारित होगा कि एक विकशित राष्ट्र और एक विकासशील देश दोनों एक-दूसरे के प्रति स्वाभाविक सहयोगी बन कर दुनिया मे एक मिसाल कायम करने की ओर अग्रसर है।







