वायरल ISSUE: जी के चक्रवर्ती
सोना निकला सोना निकला भारत की किस्मत खुल गयी, देश फिर से एक बार सोने की चिड़ियां कहलायेगा जैसे बातो के जोर पकड़ने से सम्पूर्ण देश में यह बात फैलते देर नहीं लगी की उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के पहाड़ियों में 1, 2 किलो नही पूरे 3000 हजार टन सोना पाया गया है। यह खबर लगभग वैसी ही खबर थी, जैसे कि आप और हम सभी को याद अवश्य होगा कि भी कुछ एक वर्ष पहले यानिकि 14 नवम्बर 2013 में उन्नाव जिले के डौंडियाखेड़ा सुर्ख़ियों में तब आया जब कानपुर में रहने वाले एक बाबा, शोभन सरकार ने सपने में देखा था की गांव में ज़मींदोज़ हो चुके एक किले के नीचे 1000 टन सोना दफ़न है।
बाबा ने 1000 टन सोने की बात की थी। उस वक्त 22 कैरेट के सोने की कीमत बाजार में 29 हजार रुपए प्रति दस ग्राम थी। अर्थात उस हिसाब से जोड़ के देखा गया तो डोंडियाखेड़े के कुल खजाने की कीमत लगभग 29 खरब रुपये आंकी गयी थी। शोभन सरकार के आश्रम के पास बने किले में हजारो किलो सोना पाये जाने का शोर जंगल की आग की तरह पूरे देश से लेकर यहाँ तक की विदेशों तक में फैलते देर नही लगी।

कौआ कान ले गया, कौआ कान ले गया कहते हुये कौवे के पीछे लोगों के दौड़ते रहने से धीरे-धीरे पूरी भीड़ उस कौवे के पीछे दौड़ पड़ी एक ने कहा आखिर कौवा कहाँ है सब चुप, अरे भाई जरा कान तो देख लो अपनी जगह मैजूद है भी कि नहीं यह खबर भी कुछ उसी तरह की है, यह तो गलिमत समझिये कि इस खबर के सच्चाई पर से जल्दी पर्दा उठ गया नहीं तो यह पब्लिक की भीड़ को कौन रोक सकता है। अगर ये खबर कुछ एक दिन और चलती तो यहाँ पर सोना होता या न होता यह निश्चित था कि पब्लिक की भीड़ यहाँ पर भी उमड़ना शुरू हो गई होती और उस वक्त के डोंडियाखेड़ा जैसा हाल होने में देर नही लगती।
जहां देखो उस वक्त उस किले के भग्नावशेषों के आस पास के गांवों के लोगो ने इस बेरोजगारी के जमाने में कोई ठेला लगाकर चाय, पकौड़ी, तो कोई मुहँ को खुशबूदार बनाने के लिये पान बेचता हुआ नजर आने लगता था। चन्द ही घंटो में वहां मेले जैसा माहौल दिखने लगा था और हो भी कियूं नहीं घर पर बैठे रहने से तो अच्छा ही है कमसे कम कुछ पैसे ही मिलेंगे तो कुछ एक महीनो तक का घर खर्च आराम से चलेगा इसमें बुराई ही क्या है?
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सोने की तलाश में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (जीएसआई) की टीम पिछले पंद्रह वर्षों से यहां पर काम कर रही थी लेकिन अभी 8 वर्ष पहले ही जीएसआई की इस टीम ने यहाँ ज़मीन के अंदर सोने के ख़जाने की पुष्टि कर दी थी।
यूपी सरकार ने अब इसी सोने की खुदाई करने के मक़सद से इस टीले को बेचने के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है और राज्य के खनिज विभाग ने इसकी पुष्टि कर देने से यहाँ जल्द ही विभाग इस सोने को निकालने के लिए खुदाई शुरू कर देगा।
सोनभद्र ज़िले का नाम यहाँ पर बहने वाली सोन नदी के नाम से इस जिले का नाम सोनभद्र पड़ा, एक आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यह भारत का एक मात्र ऐसा ज़िला है जिसकी सीमायें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार।जैसे चार राज्यों से मिलती हुई एक औद्योगिक क्षेत्र है। यहां पर बॉक्साइट, चूना पत्थर, कोयला, सोना जैसे बहुत तरह के खनिज पदार्थ पाये जाते हैं इसलिये सोनभद्र को ऊर्जा की राजधानी भी कहा जाता है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में बिजली के संयंत्र भी लगे हैं।
इस जिले में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (जीएसआई) की टीम द्वारा पिछले पंद्रह साल से इस पर काम कर रही थी। हाँ यह बात अवश्य है कि यहाँ की घटना डोंडियाखेड़ा की घटना से अलग हैं क्योंकि यहाँ के सोने के विषय में किसी बाबा को या किसी व्यक्ति को सपना नहीं आया था बल्कि यहाँ पर GSI द्वरा स्वमं बहुत दिनों से इस पर काम किया जा रहा था। एक पत्राचार के सिलसिले में लिखे गये एक पत्र के लिक हों जाने से यह खबर देश भर में फैलते देर नहीं लगी।
वहीँ पर वास्तव में जियोजिक्लसर्वे ऑफ़ इंडिया (GSI) द्वारा इस पर अपनी रिपोर्ट देने से बात की सच्चाई पर से पर्दा उठने पर पता चला कि यहाँ के इस पहाड़ी में सोने के अयस्क अवश्य मिले हैं। इन सोने के अयस्कों से कितना शुद्ध सोना प्राप्त होता है यह तो आगे आने वाला समय ही बतायेगा अभी मौजूदा समय में तो इन सोने के अयस्कों वाले खदानों की खुदाई के लिए राज्य सरकार नीलामी कर इसका ठेका उठाने वाली है। खैर कुछ भी हो यह तो आने वाला ही वक्त बतायेगा कि इन खदानों की खुदाई से उत्तर प्रदेश राज्य को शुद्ध सोन कितने किलो या टन प्राप्त होता है।







