भालू की ऐसी भक्ति नहीं देखी होगी आपने, भजन सुनने के बाद जंगल में जाते ही हिंसक हो जाते हैं भालू, लेकिन नहीं पहुंचाया नुकसान किसी को कभी
सुनने में यकीन तो नहीं हो रहा है लेकिन बात है एकदम सौ फीसदी सच! बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य के शहडोल के जैतपुर तहसील के अंतिम छोर में प्रदेश के बॉर्डर से सटे खड़ाखोह के जंगल में राजमांडा स्थान नदी से घिरा है यहीं पर पहाड़ी में एक साधु की कुटिया है। इस कुटिया में बाबा रामदास निवास करते हैं। इस कुटिया की खास बात यह है कि बाबा रामदास जैसे ही अपने वाद्य यंत्रों को बजाकर भजन शुरू करते हैं, वैसे ही भजन की धुन सुनकर जंगल से भालू का एक दल श्रद्धा भाव से वहां आ जाता है। बताते हैं जब तक बाबा का भजन चलता है भालू वहां रुक कर भजन सुनते रहते हैं।

भक्ति और प्रेम बड़े बड़ों को बदल देती है:
साधु बाबा भक्ति में लीन अपने इष्ट देव का भक्ति भजन कर रहे हैं साधु बाबा आत्ममुग्ध होकर तानपुरे के साथ हैं और वह भजन गा रहे हैं कि अचानक उनके भजन की कर्णप्रिय आवाज सुनकर जंगल से दो भालू वहां आ जाते हैं और भगवान् के भक्तिरस का बैठकर आनंद लेते हैं भजन ख़त्म होने के बाद वो प्रसाद लेकर ही जाते हैं इस दौरान वो किसी को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचते हैं।
यह घटना शहडोल के राज मांडा की है जहां यह सिलसिला 2013 से लगातार चलता आ रहा है। बाबा जब भी भजन गाना शुरू करते हैं स्थानीय निवासी बताते हैं कि भालू भजन सुनकर उनके पास आकर बैठ जाते हैं भालू यहां रुकते हैं प्रसाद खाते हैं और भजन सुनकर अपनी गुफा में लौट जाते हैं।

हिन्दू संत की चमत्कारी सच्चाई:
जब कभी यह भालू भजन कीर्तन में नहीं पहुंच पते हैं तो बाबा इन्हें उनके नाम से पुकारते हैं और यह जहाँ कहीं भी होते हैं दौड़े चले आते हैं। बाबा ने इनका नाम चुन्नू मुन्नू रखा हुआ है। बाबा का कहना है कि वह 2013 से शहडोल के जंगल में लगातार पूजा पाठ और भजन करते चले आ रहे हैं।
बाबा का कहना है कि इस घने जंगल में वह लगातार 2013 से भजन करते आ रहे हैं और यह भालू लगातार रोज पूजा में शामिल हो रहे हैं। स्थानीय निवासी उदय भान यादव का कहना हैं कि जिस जंगली जानवरों के खौफ से लोग इस जंगल में आने से डरते हैं वहां यह बाबा बेखौफ होकर भगवान का भजन करते हैं और भालू इन्हें भक्ति भाव से सुनने आते हैं। वह कहते हैं कि वह भालू इस स्थान पर आकर एकदम भक्ति भाव में डूब जाते हैं लोग इन भालू और साधु बाबा के भक्ति भाव को देखने दूर-दूर से आते हैं।
शहडोल की स्थानीय निवासी श्यामाबाई का कहना है कि यह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और चुपचाप अपना प्रसाद लेकर चले जाते हैं। भालूओं को देखने के लिए यहाँ काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं यह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, हालांकि लोगों को डर लगा रहता है कि कहीं यह किसी को नुकसान ना पहुंचा दें इसलिए यह लोग अपने साथ लाठी-डंडे रखते हैं लेकिन लोगों का कहना हैं कि आज तक ऐसी कोई अप्रिय वारदात नहीं हुई है।

यहां के निवासी उदय भान यादव का कहना है कि मुझे एक घटना याद हैं कि पुलिस विभाग में एक चौकीदार थे उनके अनुसार उन्होंने कहा कि 2013 में बाबा आए और वह यहां एक कुटिया बनाकर रहना चाहते हैं तो उन्होंने मना कर दिया कि घना जंगल है और आप यहां नहीं रह सकते हैं क्योंकि यहां जंगली जानवरों का खतरा है तो बाबा ने कहा कि अब मेरी उम्र ऐसी नहीं है कि मैं खतरे से बचूं, मुझे अपने भक्ति भाव से रहने दीजिए, फिर उन्होंने रहने की इसकी आज्ञा दे दी। उन्होंने बताया कि यहां के स्थानीय निवासी उनको खाना पीना भी देते हैं।







