देश में चुनौती बनकर सामने आ चुके कोरोना वायरस संक्रमण के 28 मामलों ने भारत के लिए एक मुश्किल खड़ी कर दी है। वैसे भी दुनिया के सभी प्रमुख देश इसकी चपेट में हैं। दहशत तो यहां तक है जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से उन्हीं के एक मंत्री ने हाथ मिलाने से इसलिए इन्कार कर दिया क्योंकि वे कोरोना से बेहद डरे हुए हैं।

सबसे बड़ी बात यह कि इस वायरस ने दुनिया भर में चिकित्सा विज्ञान के सामने एक चुनौती खड़ी कर दी है। इसका उद्गम देश चीन तो इसके प्रकोप और डर से बेतरह प्रभावित हो चुका है। एक तरफ लोगों में संक्रमण की खबर लगातार आ रही है तो दूसरी ओर वहां का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। वहां विदेश आने-जाने वालों पर रोक लग चुकी है। भारत में भी इसका यह असर पड़ा है कि जो कच्चा माल चीन यहां आता था, उस पर एहतियातन रोक लगने के कारण यहां का बाजार भी प्रभावित हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब तो रिजर्व बैंक को पूरे मामले पर सतर्क नजर रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ वर्षों पहले चीन में सार्स नामक बीमारी ने भी उत्पात मचाया था लेकिन उसकी दहशत कोरोना के बराबर नहीं फैली थी। इसलिए स्थिति इस बार अधिक गम्भीर मानी जा रही है।
दरअसल वायरस से होने वाला संक्रमण जब तेजी से फैलता है तो फौरन यह पता लगाना मुश्किल होता है कि आखिर इसका इलाज क्या होगा। वायरस संक्रमण यों तो कभी भी और कहीं भी फैल सकता है जिनका कोई कारण पता नहीं चल पाता। पिछले दो दशकों में इस तरह कई वायरस संक्रमण दुनिया को डरा चुके हैं और आगे भी ऐसे मामले सामने आते रहेंगे। इसीलिए लक्षणों को लेकर लोगों में अफरातफरी मचना भी एक तरह से स्वाभाविक होता है। ऐसे में एक बड़ी जरूरत लोगों में जागरूकता पैदा करने की होती है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस का इलाज ईजाद करने के नजदीक पहंच जाने का दावा तो किया है लेकिन उसे मुकम्मल होने में अभी निश्चित रूप से वक्त लगेगा। इसलिए समस्या यह है कि उस स्थिति के आने तक समस्या का समाधान किस तरह होगा। इसलिए ऐसी समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र को हमेशा चौकन्ना रहना ही होगा। इससे निपटने के लिए साफ-सफाई व बचाव के अन्य उपाय अपनाने ही होंगे।
चूंकि भारत में संक्रामक रोग एक तरह से लोगों के जीवन का अंग बनकर उभरे हैं, इसलिए उम्मीद यह की जानी चाहिए कि कोरोना का मामला भी इसी कोटि में आकर इलाज के अधिक नजदीक होगा। इसके अलावा ये व्यवस्था भी करनी होगी कि आगे इस तरह की बीमारियों का तोड़ खोजने में कोई मुश्किल सामने न आए।







