कहते हैं कि मौसम की मार के आगे सब बेबस हैं अगर कहा जाए कि आजकल लोग बदलते मौसम में मौसम के बदलते रुख से रूबरू हो रहे हैं तो यह गलत नहीं होगा। पिछले दो दिनों से ख़राब मौसम से तो यही हाल है और अगर मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो फिलहाल होली तक यही हाल रहना है। कहां तो एक ओर जाड़ा जा रहा था और गर्मी के आगमन के लिए लोग अपने को तैयार कर रहे थे और कहां बारिश ने पूरा माहौल ही बदल दिया। वह भी ओलावृष्टि के साथ। अभी तक तो मुंबई की बरसात का कोई भरोसा नहीं माना जाता था लेकिन अब यूपी भी शायद इसी वर्ग में आ रहा है। फ़िलहाल इस मौसम ने किसानों की आशांवित्त उमीदों पर पानी फेर दिया और उनकी कड़ी फसल बर्बाद कर दी। किसानों की खड़ी गेहूं की फसल, चने की फसल, आलू और प्याज की खेती ओलावृष्टि बर्बाद हो गयी।

हालांकि पानी बरसने के साथ ठंडक पूरी तरह तो नहीं लौट आई है लेकिन गर्मी की जो तेजी महसूस होने लगी थी, उसमें बदलाव तो आया ही है। दूसरी बात यह कि कि मौसम में बदलाव का यह क्रम थोड़ा भी और चला तो गेहूं तथा आलू की फसल को तो इससे नुकसान होना ही है, आम की फसल भी इससे प्रभावित हो सकती है। मौसम में होने वाली इस तरह की अनिश्चितता को निश्चित ही इसका एक नया लक्षण माना जा सकता है। यह परिवर्तन क्यों हो रहा है, इस बारे में तो मौसम विशेषज्ञ ही बेहतर ढंग से बता सकते हैं लेकिन जहां तक आम जनजीवन की बात है तो अतिरिक्त सावधानी की जरूरत जरूर उत्पन्न हो गई है। खासकर स्वास्थ्य के मामलों में।

इस बात को देखते हुए कि हम इस समय किसी एक मौसम के बीच समय नहीं गुजार रहे हैं, चौकसी रखनी ही पड़ेगी। बच्चों और बुजुर्गों के लिये तो यह चौकसी ज्यादा ही रखनी पड़ेगी क्योंकि मौसम परिवर्तन से ये कुछ अधिक ही प्रभावित होते हैं। माना जा सकता है कि इस समय हम मौसम के तीन रूपों के बीच चल रहे हैं। किसी भी चीज के जब तीन अलग स्वरूप सामने आते हों तो उनमें सामंजस्य बैठाना जरूरी हो जाता है और यही जरूरत इस समय आ गई है।







