पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में आए उलटफेर के बाद अब सारी निगाहें संसद के आगामी मानसून सत्र पर टिक गई हैं। चुनावी नतीजों और उसके बाद की राजनीतिक गतिविधियों से NDA के संख्या बल में वृद्धि के साथ ही सरकार की कार्यसूची को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि मजबूत जनादेश और बढ़ी हुई ताकत से उत्साहित मोदी सरकार इस सत्र में कई अहम विधेयक पेश कर सकती है।
इसी कड़ी में सबसे चर्चित होने वाला है 130वां संविधान संशोधन विधेयक। इसके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों पर पांच वर्ष या उससे अधिक सजा वाले गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि होने पर पद से तत्काल हटाने का प्रावधान प्रस्तावित है। साथ ही गिरफ्तारी और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने की स्थिति में भी पद छोड़ने का नियम लाने की तैयारी है।
देश की राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों का बढ़ता दखल लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय रहा है। कानूनी loopholes का फायदा उठाकर गंभीर आरोपों वाले व्यक्ति संसद और विधानसभाओं तक पहुंच जाते हैं। चुनाव आयोग, राजनीतिक दल और समाज सभी इस समस्या को स्वीकार करते हैं, लेकिन टिकट वितरण में इच्छाशक्ति का अभाव साफ दिखता है। चुनाव आयोग भी इस दिशा में कोई सख्त और स्पष्ट रुख अपनाने में पीछे रह गया है।
पिछले साल अगस्त में सरकार ने यह विधेयक संसद में पेश किया था, लेकिन विपक्ष की आपत्तियों के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया। विपक्ष ने समिति का बहिष्कार कर दिया, फिर भी समिति की रिपोर्ट के बाद मानसून सत्र में विधेयक को दोबारा पेश किए जाने की संभावना है।
यह विधेयक क्यों जरूरी है?
- सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और पारदर्शिता लाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य है।
- नैतिकता और साफ छवि वाले लोगों को जनप्रतिनिधि बनाने का मार्ग प्रशस्त होना चाहिए।
- राजनीति को अपराध-मुक्त करने की दिशा में यह एक गुणात्मक कदम साबित हो सकता है।
लेकिन सावधानियां भी जरूरी
किसी भी नए कानून को इस बात का ध्यान रखना होगा कि इसका दुरुपयोग न हो। विपक्षी दलों को अस्थिर करने या राजनीतिक बदले की भावना से इसका इस्तेमाल न किया जा सके। प्रावधान इतने संतुलित होने चाहिए कि लोकतांत्रिक ढांचे को कोई नुकसान न पहुंचे और केवल वास्तविक गंभीर अपराधों पर ही लागू हों।
यदि 130वां संविधान संशोधन विधेयक सही मायनों में मजबूत और संतुलित रूप में लागू होता है, तो यह देश की राजनीति में स्वच्छता और नैतिकता का नया अध्याय शुरू कर सकता है। मानसून सत्र में इस विधेयक पर गंभीर चर्चा, सभी दलों का सहयोग और विपक्ष की वैध चिंताओं को समाहित करते हुए एक मजबूत कानून बनाना चाहिए।
राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम होना चाहिए। अपराधियों और भ्रष्ट तत्वों से मुक्त राजनीति ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान होगी। उम्मीद है कि इस बार संसद इस दिशा में ठोस और ऐतिहासिक कदम उठाएगी। फिलहाल देश की राजनीति को साफ करने का समय आ गया है।







