विश्व भर में कोरोना वायरस के फैलने की गति कुछ धीमी हुई पर इसका दायरा बढ़ा है। कई देशों में तो यह नए सिरे से दहशत का कारण बना है। इनमें ईरान का नाम प्रमुख है जहां अन्य लोगों के अलावा सांसद स्तर की दो महिलाओं को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। नौ और देशों में इसके फैलने के साथ प्रभावित देशों की संख्या 85 से बढ़कर 94 हो चुकी है। चीन में संक्रमित मामलों की संख्या 80 हजार को पार कर चुकी है। भारत में इससे प्रभावितों की संख्या बढ़ रही है और अब यह संख्या 43 हो चुकी है। चिन्ता को और गहराने की बात विश्व स्वास्थ्य संगठन वह वक्तव्य भी है जिसके अनुसार फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि गर्मी में कोरोना वायरस (कोविड-19) खत्म हो जाएगा।
अनुमान है कि ये वायरस फैलता रहेगा। यह स्थिति तब है जब गर्मी अभी कायदे से शुरू भी नहीं हुई है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि इससे हर स्तर पर निपटने के लिये तैयारियों में कोई कमी नहीं रहने दी जाय। इस दृष्टि से भारत की तैयारियों को पर्याप्त भले न माना जाय लेकिन संतोषजनक जरूर कहा जा सकता है।

जांच के लिए देश भर में 52 प्रयोगशालाओं को परीक्षण लायक बनाया जाना इसकी दिशा में एक प्रमुख कदम है। इनमें वायरस की स्थिति का पता तो लगाया जा सकेगा। हालांकि जिस ढंग से इसके वायरस की पुष्टि होने के मामले बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरते जाने की जरूरत बढ़ गई है। इसके अलावा ऐसे मामलों के इलाज को भी और अधिक कारगर बनाना होगा। वहीं, नागरिकों को इसे लेकर हर तरह का एहतियात बरतना भी जरूरी हो गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि अफवाहों से दूर रहें तथा हाथ मिलाने से बचें। हाथ मिलाना वैसे भी कोई बहुत आवश्यक क्रिया नहीं है बल्कि नमस्ते हमारा पारम्परिक अभिवादन है तो उसे अपनाने में कोई दिक्कत होने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता। चूंकि ये एक-दूसरे के सम्पर्क में आने से बढ़ता है, अतः ऐसी सभी संभावनाओं से यथासम्भव दूर रहने में ही कुशल है।
ध्यान रखने की बात ये भी है कि प्रभावितों को समय से तथा उचित इलाज मिल सकने की भी पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। ऐसा न होने पर कोई भी इन्तजाम पुख्ता नहीं कहा जा सकेगा। यह बात इसलिए कहनी जरूरी हो जाती है कि देश में चिकित्सा सुलभता अपेक्षित रूप से आज भी सुनिश्चित नहीं कही जा सकती। चूंकि यह एक विशिष्ट स्थिति है, अतः इससे निपटने के लिये कदम भी उसी ढंग से उठने आवश्यक हैं। दुनिया में विस्तार कर रहे इस वायरस के बचाव ही इसका सबसे बड़ा इलाज है।







