फायरिंग, पटाखे और मशाल जुलूस वाले समर्थक
- नवेद शिकोह
पांच अप्रैल रविवार रात नौ बजे उम्मीदों और हौसलों की रोशनियें से जगमगाता भारत एक बार फिर दलील दे रहा था कि इस देश के प्रधानमंत्री जन नेता हैं। उनकी एक हिदायत पर देश एकजुट होकर हर चुनौती से लड़ने को तैयार रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का आलम ये है कि लोगों में उनकी चाहत का एक जुनून है। कठिन वक्त में विरोधी भी उनके साथ खड़े दिखते हैं। ये सब देखकर ही मोदी के करोड़ों फॉलोवर्स को समर्थक या प्रशंसक नहीं कहा जाता, आम और व्यंग्यात्मक लहजे में इन्हें भक्त कहते हैं। ये भक्त भाजपा और इस पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी की ताकत हैं। किंतु इनमें से कुछ मोदी दीवानों की दीवानगी इतनी आउट ऑफ कंट्रोल हो जाती है कि ये भाजपा की ताकत के बजाय पार्टी के लिए घातक साबित होते हैं। ऐसे ही अति उत्साही लोगों को भाजपा विरोधी अंधभक्त कहते हैं।
रविवार पांच अप्रैल रात नौ बजे जब पूरा देश प्रधानमंत्री के आदेशानुसार पूरे अनुशासन के साथ अपने-अपने घरों में अंधेरे के खिलाफ रौशनी बिखराने में एकजुट था, तब चंद नादान भारत के इस सामाजिक अनुष्ठान को किरकिरा करने पर आमादा थे। प्रधानमंत्री ने खासतौर से ताकीद की थी कि अपने-अपने घरों की लक्ष्मण रेखा पार नहीं करनी है। दरवाजों, बालकनी, बरामदे या छतों पर दीआ, मोमबत्ती, टार्च या मोबाइल की फ्लैश लाइट जला कर कोरोना महामारी के अंधेरे के खिलाफ रौशनी बिखेरते हुए एकजुट हों। जिससे लोगों में हौसला, उम्मीद और एकजुटता की भावना पैदा हो।
ऐसा हुआ भी। किंतु कुछ भक्त टाइप के भाजपा/मोदी के अंध भक्तों ने इसके दस कदम आगे निकलते हुए मोदी रेखा (लक्ष्मण रेखा) पार के कोरोना के खिलाफ लड़ाई के बजाये इस वायरस को फैलाने जैसे गुनाह के गुनाहगार हो गया।
देश के कुछेक इलाकों से खबरें और वीडियो सामने.आये जिसमें लोगों की भीड़ मशाल जुलूस निकाल रही है। नाचते-गाते.. आतिशबाजी.. पटाखे, बम, रॉकेट जलाते लोग सड़कों पर निकल आये। शोर-शराबे, हो-हल्ला में दीवाली का उत्साह और होली के रंग नजर आ रहे थे। लोग झुंडों में पटाखे जलाते हुए सड़कों पर उतर आये थे। अति उत्साह की इन मस्तियों में ये लोग ये भी भूल गये कि जिस कोरोंना से लड़ने के संकल्प के लिए चरागा के बजाये जश्न मनाने जैसी गतिवियां बेहद अमानवीय हैं। क्योंकि कैरोना वायरस से पूरी दुनिया में मौतों का सिलसिला जारी है। हमारा देश भी इसके खतरों से जूझ रहा है। हजारो़ भारतीय इस वायरस की जद मे हैं। दर्जनों को इस मर्ज ने मौत के मुंह में डाल दिया है। मरने वाला का सिलसिला तेज हो रहा है। ऐसे में हम फुलझड़ियों, बम, रॉकेट जलाकर क्या साबित करना चाहते है।
यही नहीं भाजपा की महिला मोर्चा अध्यक्ष मंजू तिवारी ने पिस्टल से हवाई फायर करके मोदी जी द्वारा घरों में दीप जलाने के आह्वान को पूरा किया।
शायद ऐसे ही लोगों को ही अंध भक्त कहा जाता है। भक्ति अच्छी होती है, लेकिन अंध भक्ति बेहद बुरी होती है। अब लगने लगा है कि विपक्षी और आलोचक ख़ेमें ने अंध भक्त जैसा जुमला गलत नहीं गढ़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करोड़ों जबरदस्त प्रशंसकों जिन्हें हम उनका भक्त भी कह सकते हैं, इन भक्तों में चंद लोग अंध भक्त हैं। जन नायक जैसी छवि में उभर रहे नरेंद्र मोदी के अंध भक्तों की दीवानगी, जुनून और उति उत्साह लगातार सुर्खियां बनता रहा है। सच पूछिये तो मोदी को अपने आलोचकों से ताकत़ मिलती हैं लेकिन अंधभक्तों की हरकतों से प्रधानमंत्री मोदी, सरकार, भाजपा और भाजपाक्ष के शीर्ष नेताओं को शर्मिंदा होना पड़ता है। भाजपा के अनुशासन के सामने सवालिया निशान खड़े हो जाते हैं। अंधभक्ति के अति उत्साह में बहकर बेतुकी, असंवैधानिक और गैर कानूनी हरकतें करने वाले अंधभक्तों की वजह से भाजपा/मोदी भक्तों और कार्यकर्ताओं का शर्मिंदगी में सिर झुक जाता है।
अनुशासित भाजपा के चंद समर्थकों और कार्यकर्ताओं को लेकर सोशल मीडिया में सवाल खड़े किये जा रहे हैं। इनका मज़ाक भी उड़ाया जा रहा है। कोई लिखता है-
काउंसलर के पास एक महिला गई और बोली- सर गृहस्थ जीवन ठीक नहीं चल रहा है।
कॉउंसलर बोला- तुम्हारा पति ठीक नहीं है क्या! वो लापरवाह है, बेरोजगार है या तुम्हारा कहना नहीं सुनता !
महिला बोली- पति बेरोजगार नहीं, अच्छी नौकरी हैं उनकी। पैसे वाले भी हैं। लापरवाह भी नहीं है। मेरा खूब कहना मानते हैं। सम्मान भी बेहद करते हैं मेरा।
कॉउंसलर- फिर क्या दिक्कत है !
महिला- पति ही दिक्कत बने हैं।
कॉउंसलर- वो कैसे!
महिला- वो मेरा इंतेहा से ज्यादा सम्मान करते हैं। लिमिट से ज्यादा कहना मानते हैं।
कॉउंसलर- इसमें दिक्कत क्या है !
महिला- मेरे सम्मान में वो हमेशां खड़े रहते हैं। जब कहती हूं कि बैठ जाओ। तब मेरे आदेश का पालन दो कदम आगे ही करते हैं, और लेट जाते हैं।
इस तरह की कहानियों के साथ मशाल जुलूस निकालने, फायरिंग करने और पटाखे फोड़ कर उत्सव मनाने वालों का मजाक उड़ाकर उन्ह़े अंधभक्त कहा जा रहा है।







