Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, October 28
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    कोरोना: जब इंसान डर रहा है तो प्रकृति मुस्कुरा रही है

    By May 17, 2020 Current Issues 4 Comments9 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    file photo
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 682

    पंकज चतुर्वेदी

    यमुनोत्री से इलाहबाद तक के अपने सफर में यमुना नदी का प्रवाह दिल्ली में महज दो फीसदी है ,लेकिन यहां का जहर इसके कुल प्रदुषण  का 76 फीसदी  इजाफा करता है। सन 1994 से अभी तक दो हजार करोड़ खर्च कर भी जब नदी के हालता में लेशमात्र बदलाव नहीं आया तो शायद प्रकृति ने ही इसे दुरूस्त करने का जिम्मा ले लिया। एक अदृश्य से जीव के खौफ से राजधानी थमी तो 12वें दिन ही दिल्ली में यमुना करीब 60 प्रतिशत तक साफ हो गई । पल्ला से वजीराबाद बैराज के पहले तक और सिग्नेचर ब्रिज से ओखला बैराज तक तो पानी शीशे जितना साफ हो गया है। वजीराबाद नवगजा पीर के सामने नजफगढ़ और बुराड़ी बाईपास से आ रही गंदे नाले के पानी वाली जगह छोड़ दें तो पल्ला से लेकर ओखला बैराज तक कहीं पानी गंदा नहीं है।

     

    कोरोना जीवणु के असर को निष्प्रभावी करने के लिए कल-कारखाने क्या बंद हुए, 4 सप्ताह में ही पूरे देश की नदियां जल-संपन्न हो गईं। हमारी नदियों में पानी की मात्रा पिछले 10 सालों में सबसे अधिक हो गई है। देश-बंदी के बाद दो अप्रैल तक के आंकड़ै बानगी हैं कि गंगा नदी में 15.8 बीसीएम पानी उपलब्ध है, जो कि नदी की कुल क्षमता का 52.6 फीसदी है। पिछले साल इसी समय गंगा नदी में मात्र 8.6 बीसीएम पानी था। इसी तरह से नर्मदा में क्षमता का 46.5 प्रतिषत  अर्थात 10.4बीसीएम पानी उपलब्ध है। पिछले साल इसी समय 31 फीसदी पानी था और 10 साल में यहां औसतन 26.4 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। तापी नदी में  पिछले साल इस समय मात्र 16 फीसदी जल था ,लेकिन इस साल 66 प्रतिषत है।  इसी तरह माही, गोदावरी, साबरमति, कृश्णा, कावेरी हर नदी की सेहत सुधर गई है।

     

    हर त्रासदी अपने साथ कोई सबक दे कर आती है। इसमें कोई श क नहीं कि कोरोना वायरस से फेली वैश्विक  महामारी पूरी दुनिया के लिए खतरा बनी हुई है। अभी ना तो इसका कोई माकूल इलाज खेाजा जा चुका है और ना ही इस वायरस के मानव शरीर में प्रविष्ट  होने का मूल कारण । इंसान अपने-अपने घरों में बंद है। ‘विकास’ नामक आधुनिक अवधारा और असुरक्षा के नाम पर हथियारों की होड़ नैपथ्य में हैं। कभी युद्ध में अपने विरोधियों का खून बहाने के लिए इस्तेमाल होने वाले हथियारों को बनाने वाले कारखाने इंसान का जीवन बचाने के उपकरण बना रहे हैं।

     

    इंसान बदवहास है और अपने भविष्य  के प्रति चिंतित है। वहीं प्रकृति जोकि अभी तक अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष  कर रही थी, अब लंबी सुकुन की सांस ले रही है। देश के 85 से अधिक शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स बीते एक हफ्ते से लगातार 100 से नीचे चल रहा है। यानी इन शहरों में हवा अच्छी श्रेणी की है। लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण के कारक धूल कण पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा में 35 से 40ः गिरावट आई है। कॉर्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन, सल्फर ऑक्साइड व ओजोन के स्तर में भी कमी दर्ज की गई। अहम बात यह है कि प्रदूषण रहित यह स्तर बारिश में भी नहीं रहता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. डी साहा ने कहा कि 2014 में जब से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बनाया जा रहा है, ऐसा पहली बार है जब प्रदूषण न्यूनतम स्तर पर है। सर्दी में ऑड-ईवन लागू करने से दिल्ली की हवा में 2 से 3 प्रतिषत का सुधार आ पाता है। उसकी तुलना में एनसीआर में 15 गुना से अधिक सुधार आ चुका है।

    पंजाब के लुधियाना से हिमचाल प्रदेष की हिमच्छादित -उत्तुग पर्वतमाला की दूरी भले ही 200 किलोमीटर से ज्यादा हो, लेकिन आज दमकते नीले आसमान  की छतरी तले इन्हे आराम से देखा जा सकता है। जो प्रवासी पंछी अपने घर जाने को तैयार थे, वे अब कस्बे-गांवों की पोखरों पर कुछ और दिन रूक गए हैं। हिंडन जैसी नदी जहां गत दस सालों में आक्सीजन की मात्रा षून्य थी, अब कुछ मुस्कुरा रही है। जिन नदियों में जल-जीव देखे नहीं जा रहे थे, उनके तटों पर मछली-कछुए खेल रहे हैं। सबसे सुकुन में समुद्र है। अब उसकी छाती को चीर कर पूरे जल-गर्भ को तहस-नहर करने वाले जहाज थमें हुए हैं। अधिक मछलियों के लालच में मषीनी ट्राला चल हीं रहे तो  मछलियों का आकार भी बढ़ रहा है और संख्या भी। जहाजों का तेल न गिरने से अन्य जल-जीवों को सुकुन तो मिल ही रहा है।

     

    25 मार्च को 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद एकबारगी लगता हो कि देश की अर्थव्यवस्था का पहिया थमा है परंतु बारिकी से देखें तो इससे मानवीय सभ्यता को नई सीख भी मिली है। यातायात के साधन व कारखाने बंद होने से वायू प्रदूशण के कारण हर दिन औसतन 500 मरने वाले हों या इतने ही लोगों की सड़क दुर्घटना में मृत्यु, यह आंकड़ा थम गया हे इसके इलाज में होने वाले हर दिन के करोड़ांे के मेडिकल बिल पर विराम लगा और वाहन ना चलने से विदेश  से कच्चा तेल खरीदने पर व्यय विदेशी मुद्रा के भंडार को भी राहत।

    यह सभी जानते हैं कि बीते दो दशकों में विश्व  की सबसे बड़ी चिंता धरती का बढ़ता तापमान यानी ग्लोबल वार्मिग, जलवायु परिवर्तन है। कार्बन की बढ़ती मात्रा दुनिया में भूख, बाढ़, सूखे जैसी विपदाओं का न्यौता है। धरती में कार्बन का बड़ा भंडार जंगलों में हरियाली के बीच है। पेड़, प्रकाश संश्लेषण  के माध्यम से हर साल कोई सौ अरब टन यानि पांच फीसदी कार्बन वातावरण में पुनर्चक्रित करते है। धरती में कार्बन का बड़ा भंडार जंगलों में हरियाली के बीच है। पेड़, प्रकाष संष्लेशण के माध्यम से हर साल कोई सौ अरब टन यानि पांच फीसदी कार्बन वातावरण में पुनर्चक्रित करते है। आज विष्व में अमेरिका सबसे ज्यादा 5414 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन डाय आक्साईड उत्सर्जित करता है जो कि वहां की आबादी के अनुसार प्रति व्यक्ति 7.4 टन है।  उसके बाद कनाड़ा प्रति व्यक्ति 15.7 टन, फिर रूस 12.6 टन हैं।

    जापान, जर्मनी, द.कोरिया आदि औद्योगिक देषो में भी कार्बन उत्सर्जन 10 टन प्रति व्यक्ति से ज्यादा ही है। इसकी तुलना में भारत महज 2274 मिलियन मीट्रिक या प्रति व्यक्ति महज 1.7 टन कार्बन डाय आक्साईड ही उत्सर्जित करता है। अनुमान है कि यह 2030 तक तीन गुणा यानि अधिकतम पांच तक जा सकता है। इसमें कोई शक नहीं कि प्राकृतिक आपदाएं देशों  की भौगोलिक सीमाएं देख कर तो हमला करती नहीं हैं। चूंकि भारत नदियों का देश  है,  वह भी अधिकांष ऐसी नदियां जो पहाड़ों पर बरफ पिघलने से बनती हैं, सो हमें हरसंभव प्रयास करने ही चाहिए। प्रकृति में कार्बन की मात्रा बढने का प्रमुख कारण है बिजली की बढती खपता। सनद रहे हम द्वारा प्रयोग में लाई गई बिजली ज्यादातर जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला, प्राकृतिक गैस और तेल जैसी प्राकृतिक चीजों) से बनती है। इंधनों के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड निकलता है। हम जितनी ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करेंगे, बिजली के उत्पादन के लिए उतने ही ज्यादा ईंधन की खपत होगी और उससे उतना ही ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होगा।

    फिर धरती पर बढती आबादी और उसके द्वारा पेट भरने के लिए उपभेाग किया गया अन्न भी कार्बन बढौतरी का बड़ा कारण है। खासकर तब जब हम तैयार खाद्य पदार्थ खाते हैं, या फिर हम ऐसे पदार्थ खाते हैं जिनका उत्पादन स्थानीय तौर पर नहीं हुआ हो।

    यह तो सभी जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन या तापमान बढ़ने का बड़ा कारण विकास की आधुनिक अवधारणा के चलते वातावरण में बढ़ रही कार्बन डाईआक्साइड की मात्रा है। हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की ताजा रिपोर्ट में बताती है कि इससे हमारे भोजन में पोषक तत्वों की भी कमी हो रही है। रिपेर्ट चेतावनी देती है कि धरती के तापमान में बढ़ौतरी खाद्य सुरक्षा के लिए दोहरा खतरा है। आईपीसीसी समेत कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में इससे कृषि उत्पादन घटने की आशंका जाहिर की गई है। इससे लोगों के समक्ष खाद्य संकट पैदा हो सकता है। लेकिन नई रिपोर्ट और बड़े खतरे की ओर आगाह कर रही है। दरअसल, कार्बन उत्सर्जन से भोजन में पोषक तत्वों की कमी हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार कार्बन उत्सर्जन में बढ़ोतरी के कारण चावल समेत तमाम फसलों में पोषक तत्व घट रहे हैं।

    जब पूरी दुनिया में कल-कारखाने, वाहन बंद हो गए तो अचानक ही कार्बन उत्सर्जन की मात्रा 5 फीसदी  घट गया। इसके कारण देश और दुनिया की हवा भी स्वच्छ हो गई है। धरती का शोर और कंपन कम हो । दूसरे विष्वयुद्ध के बाद से पहली बार कार्बन उत्सर्जन का स्तर इतना गिरा है।

    भले ही एक लाइलाज बीमारी के कारण प्रकृति का इतना स्वच्छ स्वरूप उभरा हो लेकिन यह मानवीय दखल के कारण तेजी से दूषित हो रही प्रकृति ने चेतावनी दे दी कि उसके साथ ज्यादा खिलवाड़ हुआ तो उसका इलाज भी कायनात को आता है । यह किसी से छुपा नहीं कि दुनिया यायातात प्रबंधन, जाम व् औद्योगिक प्रदुषण, जल की गुणवत्ता आदि दिक्कतों से जूझ रही है और इसके मशीनी निदान पर हर साल अरबों डॉलर खर्च होते हैं । कोरोना ने बता दिया कि वह अरबों डॉलर खर्च मत करो बस हर साल में दो बार एक एक हफ्ते का लॉक डाउन कड़ाई से लागू कर दो , प्रकृति नैसर्गिक बनी रहेगी । इन दिनों अपराध कम हो रहे हैं, सडक दुर्घटना कम हो रही हैं ,दूषित खाना खाने से बीमार होने वालों की संख्या कम हो रही है .

    क्या आफिस का बड़ा काम घर से हो सकता है ? क्या स्कूल में बच्चों का हर रोज जाना जरुरी नहीं ? क्या समाज के बेवजह विचरने की आदत पर नियंत्रण हो सकता है ? ऐसे भी कई सवाल और प्रकृति – शुद्धिकरण के विकल्प ये दिन सुझा रहे हैं। यह सही है कि धरती पर कोई  ज्ञी तूफान ना तो स्थाई होता है और ना अंतिम लेकिन इस बार की त्रासदी ने जता दिया कि धरती की प्राथामिकता हथियार नहीं, वेंटिलेटर हैं, सेना से जरूरी डॉक्टर हैं। आम इंसान को भी घरों में बंद रहने के दौरान समझ आ गया कि हमारे पास जितना है, उतने की जरूरत नहीं, जरूरत है तो मानवीय संबांधों के प्रति संवेदनात्मक होने की।

    फिलीपींस के समुद्र तट इन दिनों गुलाबी रंग की जेली फिष से पटे पड़े हैं। विहंगम नजारा है।  असल में ये तट सामान्य दिनों में पर्यटकों से भरे रहते हैं। ऐसे में समुद्र के जलीय जीव तटों के किनारे अपना डेरा जमा रहे हैं। पालावन तट के पास विशेषज्ञों ने हजारों की संख्या में गुलाबी जेलीफिश को देखा। इन जेलीफिश को सी टोमैटो कहा जाता है। ये जेलीफिश धीरे-धीरे सतह के ऊपर आ रही हैं क्योंकि उन्हें लोगों की गैर मौजूदगी में डर नहीं लग रहा।  वैसे ये जेलीफिष लोगों की भीड़ से घबरा जाती हैं पर्यटकों के तटों पर होने के कारण ये जेलीफिश समुद्र के तल में चली जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कई दिनों से कोई हलचल नहीं होने के कारण ये जेलीफिश सतह पर आ गई।

    Keep Reading

    नीले ड्रम’ हत्याकांड पर आया फैसला : जैसी करनी, वैसी भरनी

    अकीदा बनाम अंधविश्वास: पक्के विश्वास और भटकती भीड़ की दास्तान

    नालसा का एलएडीसी सिस्टम खत्म करने का फैसला: क्या गरीब कैदियों से छिन जाएगा न्याय का सहारा?

    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    4 Comments

    1. Vigorouxmaleenhancement says on May 29, 2020 1:39 pm

      Wow! Thank you! I constantly needed to write on my website something like that.
      Can I implement a portion of your post to my blog?

      Here is my website: Vigorouxmaleenhancement says

      Reply
    2. Total Releaf CBD Review on May 29, 2020 7:41 pm

      Hi there, I found your site by means of Google whilst searching for a related subject, your site
      got here up, it seems good. I’ve bookmarked it in my google bookmarks.[X-N-E-W-L-I-N-S-P-I-N-X]Hi there, simply changed into
      alert to your blog via Google, and found that it’s truly
      informative. I am going to watch out for brussels.
      I will be grateful in case you continue this in future.

      A lot of other folks shall be benefited from your writing.
      Cheers!

      Feel free to surf to my web blog: Total Releaf CBD Review

      Reply
    3. Total Releaf CBD - Support Your Health Naturall! | Special Offer! on May 29, 2020 8:16 pm

      I loved as much as you’ll receive carried out right here.
      The sketch is attractive, Total Releaf CBD – Support Your Health Naturall! | Special Offer! authored
      subject matter stylish. nonetheless, you command get
      bought an edginess over that you wish be delivering the following.
      unwell unquestionably come further formerly again since exactly the
      same nearly a lot often inside case you shield this increase.

      Reply
    4. https://electronics-pluz.com/reviews/torchbeam-tactical-flashlight/ on May 29, 2020 8:46 pm

      Hello there! Do you use Twitter? I’d like to follow you if
      that would be ok. I’m definitely enjoying your blog and look forward to new updates.

      My web site: https://electronics-pluz.com/reviews/torchbeam-tactical-flashlight/

      Reply
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    From Ravana on Screen to a Power Player Behind the Scenes! Yash Makes a Big Move in ‘Ramayana’ Distribution

    पर्दे पर रावण, पर्दे के पीछे पावरफुल खिलाड़ी ! ‘रामायण’ के डिस्ट्रीब्यूशन में यश की बड़ी एंट्री

    October 27, 2026
    This very land gave us a hero like Abdul Hamid, and now a grand memorial for Maharaja Suheldev is being built: CM Yogi.

    युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करना ही नए उत्तर प्रदेश के विकास का संकल्प: सीएम योगी

    October 26, 2026
    Big revelation in Tiger Shroff firing case: Superstar Aamir Khan was the target of Lawrence Bishnoi gang, his house was reconnoitered three times.

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर थे सुपरस्टार आमिर खान, घर की हुई थी तीन बार रेकी

    October 26, 2026
    A spirit has come to fulfill his girlfriend's unfulfilled dream? A viral video shows a ghost bathing and changing clothes with her lover!

    प्रेमिका का अधूरा सपना पूरा करने आई आत्मा? वायरल वीडियो में प्रेमी के साथ नहाते और कपड़े बदलते दिखा भूत!

    October 26, 2026
    The arrogance of the leader 'close to the MLA' was shown in front of the paddy harvesting machine, video goes viral on social media!

    ‘विधायक जी के करीबी’ नेता जी की धान काटने वाली मशीन के आगे निकली हेकड़ी, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल!

    October 26, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading