- लॉकडाउन-2.0 में 20 अप्रैल से ई कामर्स कंपनियों की आजादी से खुदरा व्यापारियों को था खतरा
- कई व्यापारी संगठनों ने जताया था सरकार के प्रति रोष
- केंद्र सरकार ने बदला फ़रमान, ई कॉमर्स कंपनियाँ भी लॉकडाउन में रहेंगी अब लॉक
- राहुल कुमार गुप्त
लखनऊ, 19 अप्रैल, 2020: देश के समक्ष ही नहीं वरन् विश्व में महासंक्रमण के भय से एक अजीब सी हलचल है। यह हलचल भी विशेष प्रकार की है, सभी सरकारें इंसानों को घर में रहने की सलाह दे रही हैं। सभी कामधंधे बंद हैं। विश्व के लगभग कई देशों में लॉकडाउन की स्थितियाँ हैं। विकासशील देशों में बहुत सी समस्याएं सरकारों से ज्यादा उस देश की जनता के समक्ष हैं। खासकर व्यापारियों के सामने। इनमें छोटे व मध्यम व्यापारियों के समक्ष तो दुविधाओं व समस्याओं का अंबार सा लग चुका है।
फिर भी यह व्यापारी पूरी तन्मयता के साथ अपनी हैसियत अनुसार सरकार को दान कर रहे हैं तथा व्यक्तिगत रूप से भी लोगों की सेवा में अनवरत लगे हुए हैं। सरकार ने महामारी की स्थिति को देखते हुए पुनः 3 मई तक का लॉकडाउन कर दिया। बड़े वर्ग व उच्च मध्यम वर्ग की सुविधा के लिये उनको राहत देने के लिये जल्दबाजी में एक नियम पारित कर दिया कि ई कॉमर्स कंपनियों को 20 अप्रैल से लॉकडाउन में आजादी दे दी गयी। ऐसे में खुदरा व्यापारियों के बीच रोष उत्पन्न हो गया। क्योंकि उसकी रोजी-रोटी का सरकार ने ध्यान नहीं दिया और ऊपर से कई नियम इन पर लागू किये गये। व्यापारियों का यह रोष काम आया, केंद्र सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा, मतलब ई कॉमर्स कंपनियाँ भी लॉकडाउन में लॉक ही रहेंगी। आज 19 अप्रैल की दोपहर बाद से सरकार के फैसले बदलने से खुदरा व परंपरागत व्यापारियों ने राहत की साँस ली।
बता दें कि जब सरकार ने ई कॉमर्स कंपनियों को 20 अप्रैल से बिजनेस की आजादी का फैसला लिया था तब से कई व्यापारी संगठन परेशान थे। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल ने इस बारे में केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिख कर आपत्ति व्यक्त की है। उत्तर प्रदेश वैश्य व्यापारी महासभा के अलावा भी देश के कोने-कोने से खुदरा व्यापारियों के संगठन ने सरकार के इस कदम पर नाराजगी जतायी थी। व्यापारी संगठनों ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया था कि आगामी 20 अप्रैल से ई कॉमर्स कंपनियों को कारोबार करने की जो अनुमति दी गई है उस पर फिर विचार किया जाए। इनका कहना है कोरोना संक्रमण में एक योद्धा की भांति सेवारत देशी खुदरा व्यापारियों को ग्रीन जोन में अपनी अपनी दुकानें खोलने की अनुमति दी जाये।
उत्तर प्रदेश व्यापारी महासभा के महामंत्री के पी गुप्ता व संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी प्रेस के जरिये केंद्र सरकार से माँग की थी कि लॉक डॉउन की अवधि में ई कॉमर्स कंपनियों को केवल आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की ही अनुमति दी जाए, सभी प्रकार की वस्तुओं की बिक्री की अनुमति देना उचित नहीं है। के पी गुप्ता ने कहा कि आपदा के समय सेनानी की तरह काम करने वाले व्यापारियों के लिए सरकार का उक्त कदम निराशापूर्ण था। लॉक डॉउन की अवधि में जब पूरे देश के बाजार बंद थे ,ऐसे में ई कॉमर्स कंपनियों को बिक्री की अनुमति देने से परंपरागत व्यापारियों में राजधानी लखनऊ सहित पूरे प्रदेश एवं देश के व्यापारियों में अत्यधिक नाराजगी भर गई थी।
आपदा के इस समय आवश्यक वस्तु की आपूर्ति में देश का परंपरागत व्यापारी जी जान से अपनी जान को जोखिम में डालकर लगा है तथा पूरे देश का व्यापारी समाज अपने संसाधनों से सभी की सेवा करने में लगा है। एक ओर देश के परंपरागत व्यापारियों के ऊपर किराए, बैंक के ब्याज, कर्मचारियों के तनख्वाह, विद्युत कनेक्शन के फिक्स चार्ज के खर्चों का बोझ लदा हुआ है तथा आमदनी बंद है। देश का व्यापारी समाज, सरकार से राहत पैकेज की उम्मीद कर रहा है।
दूसरी ओर सरकार इन व्यापारियों की चिंता ना करते हुए ई कॉमर्स कंपनियों को अनुमति दे रही है ,यह उचित नहीं है। लेकिन देर आये दुरुस्त आये को चरित्रार्थ करते हुए सरकार ने व्यापारियों की चिंता को दूर करने का सही प्रयास किया और ई कॉमर्स कंपनियों पर भी लॉकडाउन-1 की तरह यथावत बंदी रहेगी। सभी व्यापारी संगठनों ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।







