- प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि तकनीक परम्परागत शिक्षण का महत्वपूर्ण अंग
- ऑनलाइन कार्यशाला में देश भर से छह सौ प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
शिक्षकों, रिसर्च स्कॉलर्स और छात्रों के लिए मूडल के माध्यम से टीचिंग-लर्निंग विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन महात्मागांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा एवं बीबीएयू के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने किया। इसमें देशभर से छह सौ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने प्रतिभागियों से प्रौद्योगिकी के माध्यम से एक-दूसरे के साथ एकीकृत होकर तकनीकी के माध्यम से क्षमता बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने तकनीक को परम्परागत शिक्षण का अंग बनाते हुए विद्यार्थियों, विशेष रूप से हाशिए के समुदायों के विद्यार्थियों को जोड़ते हुए इन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाने पर बल दिया, साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों का ध्यान साइबर के बढ़ते जोखिम की ओर दिलाया और उसका समाधान सोचने की आवश्यकता पर बल दिया ।
कार्यशाला का शुभारंभ कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुभाष मिश्र के द्वारा अतिथियों के परिचय एवं प्रोफेसर आशीष श्रीवास्तव, शिक्षा संकाय, डीन, स्कूल ऑफ एजुकेशन महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविदयालय के स्वागत भाषण के द्वारा किया गया, उन्होंने इस संकट की घड़ी में व्यावहारिक रूप से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में शिक्षण अधिगम के कदम के साथ और उसके आसपास होने वाले पर्यावरण के लिए अपनी चिंताओं को रखा और शिक्षण अधिगम की मदद से शिक्षकों और छात्रों की क्षमता निर्माण पर बल दिया है।
प्रो. अरविंद कुमार झा, डीन-स्कूल आफ एजुकेशन, बीबीएयू ने कार्यशाला के विषय की अवधारणा को प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के साथ संज्ञानात्मक क्रांतियों पर विस्तृत ध्यान रखना चाहिए है। उन्होंने सामाजिक कष्टों और सामाजिक जिज्ञासा को संतुष्ट करने के लिए हो रहे प्रयासों पर चिंता व्यक्त की ।
कार्यशाला में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से शिक्षक, शोधार्थी एवं तकनीकी सहायक कर्मचारी उपस्थित रहे। देश भर के लगभग 600 से अधिक प्रतिभागियों ने कार्यशाला में भाग लिया। अधिकतम प्रतिभागियों को समायोजित करने के लिए, कार्यशाला को तीन स्लॉट में नियोजित किया गया







