बलिया, 27 मई 2020: कोरोना के चलते हुई पूर्णबन्दी (लॉकडाउन) में प्रवासी श्रमिकों के पलायन के मुद्दे पर यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने केंद्र व प्रदेश सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश अंधकार में रोशनी देने वाला है।
बुधवार को जारी ऑनलाइन प्रेस नोट में नेता प्रतिपक्ष श्री चौधरी ने तंज कसते हुए कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकारों के प्रधान और उनके व्यवस्थापक सुप्रीम कोर्ट के 26 मई के फैसले को कुछ पल के लिए एयरकंडीशन कमरों से बाहर निकलकर पढ़ें। श्रमिकों को बदहाल स्थिति में ढकेलने और उसे बरकरार रखने के लिए देश से माफी मांगें।
उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से देश के मजबूत पावों में उभरे छालों के दर्द का बोध किसी भी आदमी को हो जाएगा। इसका बोध होने पर निष्ठुर आदमी की भी आंखें डबडबा जाएंगी। श्री चौधरी ने कहा है कि वर्तमान में मीडिया कर्मियों की कलम पर आपातकाल से भी अधिक कड़ा पहरा है।
सपा के निवर्तमान प्रवक्ता सुशील कुमार पांडेय कान्ह जी के माध्यम से जारी बयान में उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि श्रमिकों के लिए पर्याप्त परिवहन व्यवस्था नहीं है। न ही उनके खाने रहने का उचित इंतजाम है। केंद्र सरकार और राज्य की सरकारों के अचानक, अनियोजित फैसलों और सरकारों में आपस में तालमेल नहीं होने के कारण देश का श्रमिक भयावह दौर से गुजर रहा है।
इंतजामों की स्थिति यह है कि भारत सरकार और राज्य सरकार की देखरेख में चल रही श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में भी श्रमिक दाना पानी के अभाव में मर रहा है। ट्रेनें रास्ता भूल जा रही हैं। यही नहीं, ऐसे लोगों पर एफआईआर भी दर्ज कराएं गए हैं। जिन्होंने मानवीय आधार पर इन्हें दाना पानी दिया है।
उन्होंने कहा है कि भारत सरकार और राज्य सरकारों के इस रवैये से लोकतन्त्र और सुराज शब्द अर्थहीन हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि सरकार के जिम्मेदारों के इस रवैये से दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के पथ पर अंधकार छाया हुआ है। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में लोकतांत्रिक लोगों को रोशनी दिख रही है। उन्होंने देश और राज्य सरकार के प्रधानों से आग्रह किया है कि वह इस सच्चाई का बोध करें और केवल अफसरों का लिखा बयान पढ़ने की जगह कुछ खुद भी करने और सोचने की कोशिश करें।







