श्रावण माह के पांच सोमवार देंगें शुभ संकेत
सावन का महीना अर्थात श्रावण माह आज 6 जुलाई के दिन से शुरुआत हुई है आज का दिन और भी महत्वपूर्ण तब बन जाता है जब आज का दिन यानि कि 6 जुलाई सोमवार के दिन पड़ा है। हिन्दुधर्मलम्बियों के मध्य सोमवार का दिन भगवान शिव के दिन के रूप में हमारे मध्य स्थापित है। इसी सोम लाता नामक पौधे के रस को सोम रस के नाम से जाना जाता है। इस कारण इस दिन का नाम सोमवार पड़ा, इसका प्रमुख कारण यह है कि हिन्दू वैदिक साहित्य के अनुसार भगवान शिव जो हमेशा सोमरस का पान किया करते थे और सोम एक आयुर्वेदिक उपचार में प्रयोग होने वाला ऐसे पौधे का बेल है, जिसके पान करने से शरीर के अनेको प्रकार के व्याधियाँ हमेशा- हमेशा के लिये समाप्त हो जाया करती है और मानव शरीर हमेशा के लिये चिरयौवनता प्राप्त कर लेता है, इसलिये सोम रस के पान की प्रथा हमारे वैदिक काल के सामाजिक परम्परा में विद्यमान हुआ करता था।
लेकिन सोम नामक पौधे के बेल का प्राप्त होना प्रारम्भ से ही बहुत दुर्लभ होने के कारण सोम रस की उपलब्धता समाज के अधिक से अधिक लोगों के मध्य इसके रस के पान करने की परिपाटी विकसित नही हो पाई। ऐसी मान्यता है कि सोम लाता बहुत दुर्लभ लाता है क्यूंकि यह एक विशेष तापमान पर वाले जलवायु वाले स्थान पर ही पैदा होता है और यह विशेष जलवायु गोलक में पहाड़ो पर स्थित जहां स्वमं भगवान् शंकर निवास करते हैं। आप लोगों को शायद याद होगा जब राम जन्म भूमि अयोध्या में राजसीयू यज्ञ कराया गया था उस वख्त उस यज्ञ में इस सोम बेल की आवश्यकता पड़ी तब इसे कश्मीर में रहने वाले एक व्यक्ति से खरीद कर लाया गया था।
वह भी उस व्यक्ति के पास मात्र एक ही बेल हुआ करता था वैसे हिन्दू धमलम्बियों के मध्य भगवान शंकर के सोमरस पान करने से उनका मष्तिष्क अत्यंत गर्म होने पर उनके शीश पर जल चढ़ाने की परिपाटी आज भी निरंतर मंदिरो में शिवमूर्तियो के शीश के ऊपर एक कलश जरूर टांग जाता है जिसमे से लगातार बून्द-बून्द पानी उनके शीश पर निरन्तर टपकता रहता है और इसी लिये उनके पूजन का मास श्रवण मास रखा गया है।







