लखनऊ। नगर निगम की विशेष सदन बैठक बिना किसी एजेंडे के बुलाए जाने पर कांग्रेस पार्षदों ने जोरदार विरोध किया। उन्होंने सदन का बहिष्कार कर बाहर धरना दिया और महापौर को ज्ञापन सौंपा।
बिना एजेंडे की बैठक पर उठा सवाल
कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि बैठक में लखनऊ शहर के आम जनता से जुड़े कोई ठोस मुद्दे नहीं रखे गए। ऐसे में सदन को बुलाना सिर्फ पैसे की बर्बादी है। उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर ने भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए यह बैठक बुलाई।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विवाद
विपक्षी पार्षदों ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (महिला आरक्षण कानून) पहले ही पास हो चुका है। अब इसे जस-का-तस लागू करना चाहिए। लेकिन लोकसभा में डिलिमिटेशन (परिसीमन) बिल फेल होने के बाद भाजपा के दबाव में महापौर ने इस मुद्दे पर अनावश्यक चर्चा कराई।
कांग्रेस ने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रयासों से ही पंचायतों और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33% आरक्षण मिला था। आज लखनऊ नगर निगम में बड़ी संख्या में महिला पार्षद इसी वजह से सेवा कर रही हैं।
कांग्रेस की मुख्य मांगें
कांग्रेस पार्षदों ने महापौर को ज्ञापन देकर ये चार अहम मांगें रखीं:
- महिला आरक्षण कानून 2023 को तुरंत लागू किया जाए।
- सभी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में 33% महिला आरक्षण लागू हो।
- पंचायतों-नगर निकायों में 33% आरक्षण के लिए स्व. राजीव गांधी और कांग्रेस सरकार को धन्यवाद प्रस्ताव लाया जाए।
- विभाजनकारी परिसीमन विधेयक को खारिज कर देश की एकता बनाए रखने के लिए संसद का धन्यवाद किया जाए।
जनता के पैसे की बर्बादी का आरोप : पार्षदों ने कहा कि करदाताओं के खून-पसीने की कमाई से यह सदन चलता है। यहां लखनऊ के विकास, सड़क, पानी और सफाई जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, न कि 20-25 रुपये प्रति पार्षद की बर्बादी कर भाजपा का राजनीतिक एजेंडा चलाया जाए।
बता दें कि यह घटना लखनऊ नगर निगम में राजनीतिक तनाव को और बढ़ाती दिख रही है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह महिलाओं के सशक्तिकरण की पक्षधर है, लेकिन अनावश्यक और राजनीतिक रूप से प्रेरित चर्चाओं का विरोध करेगी।







