एनपीसीएल कंपनी पर आरोप: कंपनी बिल्डरों से साठगांठ कर अनेकों मल्टीस्टोरी काम्पलेक्सो में कम भार का ट्रांसफार्मर लगवा कर बिना मानक के अनरूप इंफ्राटेक्टचर तैयार करवाये बिना दिया था सिंगल पॉइंट कनेक्शन और उसका अब खामियाजा भुगत रहें उपभोक्ता
प्रदेश में निजी क्षेत्र की पहली बिजली कंपनी नोयडा पावर कम्पनी (NPCL एनपीसीएल) जिस पर बिल्डर से साठगांठ कर लगातार उपभोक्ताओ के उत्पीड़न कराने की शिकायत लगातार आ रहीे थी। इस मामले में उपभोक्ता परिषद ने इसकी शिकायत प्रदेश के ऊर्जामंत्री से कि थी और विद्युत नियामक आयोग से भी मामले में हस्तक्षेप करने कि गुजारिश कि थी, आज इस मामले में उपभोक्ता उत्पीड़न पर विराम लग गया।
बता दें कि दो दिन पहले उपभोक्ता परिषद् ने नियामक आयोग की सुनवाई में इस मामले को पूरे साक्ष्य के साथ गंभीरता से रखा था, जिसे नियामक आयोग चेयरमैन श्री आरपी सिंह ने बहुत ही गम्भीरता से लिया है और उसी क्रम में नियामक आयोग ने अब नोएडा पावर कंपनी के वॉइस चेयरमैन ऑप्रेशन श्री एस गांगुली को नोटिस देते हुए 14जुलाई को सुनवाई लगाई है। कंपनी पर आरोप है की एनपीसीएल बिल्डरों से मिलकर बड़े पैमाने पर मल्टीस्ट्रोरी में नियमों के बिपरीत बिना मानक के अनरूप भार का ट्रांसफार्मर लगवाये इंफ्राटेक्टचर तैयार कराए बिना ही सिंगल पॉइंट का संयोजन बिल्डर को दे दिया गया था और बिल्डरो ने बड़े पैमाने पर फ्लैटों को अधिक कनेक्शन देकर बड़ा फिक्स्ड चार्ज वसूल रहे है
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यह कहना गलत नहीं होगा की एनपीसीएल बिल्डरों से साॅंठ – गाॅंठ करके उन्हें कम भार पर मल्टीस्टोरी में कनेक्शन दे देता है फिर बिल्डर उपभोक्ताओं को ज्यादा भार पर कनेक्शन देकर लाभ कमाते हैं और उपभोक्ताओ को आये दिन ब्रेक डाउन व विद्युत व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है जबकि यह जिम्मेदारी वहा की कंपनी एनपीसीएल की है की उसने बिना बिल्डरों से पूरी कैपेसिटी का ट्रांसफार्मर लगवाये मानक के तहत बिना इंफ्राटेक्टचर तैयार किए संयोजन क्यों निर्गत कराया गया आयोग ने इसे बिदूत वितरण संहिता 2005 का उलघन माना है । नियामक आयोग ने सुपरटेक इको विलेज-1 का एक उदाहरण भी दिया है जहा पर आधा अधूरा काम हुवा है ।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जब तक बिल्डरों द्वारा उपभोक्ताओ का उत्पीड़न बंद नहीं किया जाता सबको बिजली विभाग से संयोजन नहीं मिल जाता उपभोक्ता परिषद् चुप नहीं बैठेगा। उपभोक्ता परिषद् की तरफ से संहिता 2005 के 13 वे संशोधन में 51 प्रतिशत की बाध्यता को खत्म करने अथवा काम करने हेतु जरूरी संशोधन का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग को सौंप दिया गया है जल्द उस पर आयोग द्वारा निर्णय लिए जाने की पूरी उम्मीद है अभी अनेको जगह मल्टीस्टोरी में बिल्डर स्वयं या अपने गुर्गो के नाम ही ज्यादातर फ्लैटों पर कब्जा जमाए है जिससे जब 51 प्रतिशत उपभोक्ता बिजली विभाग से संयोजन हेतु अपंनी सहमती देना चाहते है तो नहीं दे पाते क्यों की बिल्डर ज्यादातर फ्लैटों पर कब्जा जमाए जो उसका विरोध करते है।







