किसानों, शिक्षित युवाओं और उद्यमियों को रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
लखनऊ, 06 अगस्त 2020: औषधियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए अग्रणी संस्था औषधि एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप) ने भांग पर अनुसंधान शुरू किया है। इसकी सफलता के बाद मानव जाति के कल्याण के लिए देश में भांग की खेती काे बढ़ावा मिलने के साथ ही किसानों को भी काफी अवसर मिलने की संभावना है। सीमैप द्वारा भारतीय भांग के जीनोटाइप्स में पाए जाने वाले औषधि तत्वों जैसे टीएचसी, सीबीडी और कैनबिडिड टेरपिन का पता लगाने के लिए एक अनुसंधान परियोजना चलाई जा रही है। यह परियोजना मैसर्स अशीष कॉन्सेंट्रेट्स इंटरनेशनल एलएलपी (एसीआई), मुंबई द्वारा वित्तपोषित की गयी है।
प्राचीन समय से ही भारतवर्ष में, भांग का उपयोग होलिस्टिक हीलिंग के लिए आयुर्वेदिक, सिद्धा और यूनानी दवाइयों में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक प्रमाण मिलते हैं कि भांग के सभी जेनेटिक मेटीरियल स्ट्रेन्स का उदगम भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ है ।
परियोजना की वार्षिक समीक्षा करने के बाद डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी, निदेशक, सीएसआईआर – सीमैप ने गुरुवार को बताया कि इंडस्ट्री के साथ इस संयुक्त शोध से मानव जाति के कल्याण के लिए देश में भांग की खेती तथा उसके उत्पादों को पुनः प्रचलित करने में मदद मिलेगी और साथ ही साथ किसानों को भी अवसर मिलेंगे। उन्होने यह भी बताया कि परियोजना के पहले वर्ष में, डॉ. बीरेंद्र कुमार, सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट, सीएसआईआर – सीमैप की देखरेख में 15 वैज्ञानिकों की एक टीम मॉर्फो-एनाटोमिकल, केमिकल और यील्ड पर एक विस्तृत अध्ययन करने में सक्षम रही है।
परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. बिरेन्द्र कुमार ने गुरुवार को बताया कि आने वाले वर्ष में परियोजना का उद्देश्य कई सिंथेटिक और रासायनिक दवाओं के प्राकृतिक विकल्प के रूप में कैनबिस के अर्क की प्रभावकारिता को साबित करने के लिए टेस्टिंग करना शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि, पिछले कुछ महीनों में, टीएचसी, सीबीडी, टीएचसी-ए और कैनाबिनोइड टेरपिन के विभिन्न स्तरों के साथ कई जेनेटिक मेटीरियल स्ट्रेन्स की खोज की गई है जो अंतर्राष्ट्रीय औषधीय कैनबिस उद्योग के लिए अमूल्य होगी।
मेसर्स अशीष कंसंट्रेड इंटरनेशनल एलएलपी के संस्थापक डेरीएस चेनॉय ने बताया कि आशीष एंटिया के साथ मिलकर कंपनी भारत में भांग के अनुसंधान में तेजी लाना चाहती है। इस परियोजना में टीम के अन्य सदस्य हर्षवादान आमेरसे और एमी नार्गोलकर हैं, जिनके पास अंतरराष्ट्रीय कैनबिस कंपनियों के साथ काम करने का व्यापक अनुभव है। भांग पर आधारित औषधीय उत्पादों की इंडस्ट्री से भारत में “मेक इन इंडिया” के तहत उद्योग स्थापित करके किसानों, शिक्षित युवाओं और उद्यमियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।







