आनलाइन प्रशिक्षण की शुरूआत
केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ में तीन दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण की शुरुआत मंगलवार को हुई। अगले दो दिन चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने किया। इस कार्यक्रम में देश के उत्तराखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडू सहित 15 राज्यों से 74 किसानों व उद्यमियों ने ऑनलाइन भाग लिया। डाक्टर प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने कहा कि किसान इन औषधीय एवं सुगंधित फसलों को अपने पारंपरिक फसल चक्र में समाहित कर अच्छा लाभ ले सकते हैं।

उन्होंने कहा कि औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, प्रसंस्करण तथा विपणन विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाना अपने आप में अनूठी पहल है, क्योंकि इस कोरोना काल में एक जगह पर इक्कट्ठा नहीं हो सकते। इसलिए तकनीकी का उपयोग कर किसानों के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम कराते रहने के लिए आश्वस्त किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से किसान भाई औषधीय एवं सुगंधित फसलों की उन्नत कृषि तकनीकियों तथा इनकी उन्नत प्रजातियों को अपना कर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं। डॉ. आलोक कालरा, भूतपूर्व, निदेशक, सीएसआईआर.सीमैप ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया।
खस व नीबू घास के उन्नत खेती की दी जानकारी:
तकनीकी सत्र में डॉ संजय कुमार ने नीबूघास की उन्नत कृषि तकनीक को भी प्रतिभागियों से साझा की। डॉ. राजेश वर्मा ने खस के उत्पादन की उन्नत कृषि तकनीकी के बारें में प्रतिभागियों को जानकारी दी। इसी क्रम मे डॉ रमेश कुमार श्रीवास्तव ने सिट्रोनेला एवं तुलसी की उन्नत कृषि तकनीकियों पर डॉ राम सुरेश शर्मा ने किसानों से विस्तार से चर्चा की।
डॉ सौदान सिंह ने मिंट की उन्नत कृषि क्रियाओं के बारें में प्रतिभागियों को बताया। डॉ. आलोक कालरा ने जिरेनियम की उन्नत कृषि क्रियाओं के विषय में प्रतिभागियों से जानकारी साझा की । इस सत्र में प्रतिभागियों के द्वारा वैज्ञानिकों से सगंधीय फसलों से संबन्धित प्रश्न पूछे गए, जिनके उत्तर वैज्ञानिकों द्वारा दिये गए।







