पटना में होगा अंतिम संस्कार
नई दिल्ली के लुटियन एरिया के राजनीतिक गलियारों में ऐसे दर्जनों पत्रकार मिल जाएंगे जिनकी आंखे आज पासवान जी के जाने से नम है। अधिकतर पत्रकारों में यह माना जाता था कि रामविलास पासवान के दरवाजे पत्रकारों के लिए हमेशा खुले रहते थे। पासवान के घर पर पत्रकारों को सम्मान और इज्ज़त मिलती थी। पत्रकारों ने आज ऐसे एक राजनेता को खो दिया जो पत्रकारों के लिए जीता था।
वह ऐसे नेता थे जिसके मुंह पर ही कई पत्रकार कड़वी आलोचना कर दिया करते थे और वह कतई उसका बुरा नहीं मानते थे, बल्कि मुस्कुरा कर टाल दिया करते थे। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को अच्छा नाश्ता कराने और महंगे तोहफे देने के लिए मशहूर, कई छोटे और मझोले अखबारों को चलाने वाले पत्रकारों को चुपचाप नगद और चेक के माध्यम से विज्ञापन देकर उनके समाचार पत्र में सहयोग करना उनका स्वभाव था। आज वें पत्रकार अपने आप को अनाथ महसूस कर रहे हैं।
सत्ता के राजनीतिक गलियारों में रामविलास पासवान को सियासी रुख भांपने वाला माहिर खिलाड़ी माना जाता था। चुनाव से पहले ही वह राजनैतिक चुनावी माहौल का मौसम देख कर ही अंदाजा लगा लिया करते थे कि बरसात किस ओर होने वाली है यानी किसकी सरकार बनने वाली है। उन्हें पत्रकार लोग सियासत का मौसम वैज्ञानिक कहते थे। माना जाता था कि वह जिसके साथ जाते थे उसकी सरकार बनती थी।







