जी के चक्रवर्ती
बिहार राज्य में नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो जाने के बाद वहां पर चुनाव तीन चरणो में होगा जिसमें पहले चरण के वोट 28 अक्टूबर से शुरू होगा और आखिरी चरण का मतदान 7 नवंबर को सम्पन्न होगा।
यहां पर चुनाव को लेकर सरगर्मी बहुत तेज़ हो गयी है। इस बार यहां पर एक बिल्कुल नया राजनीतिक समीकरण उभर कर आया है जिसमे एनडीए की सहयोगी रही लोकजनशक्ति पार्टी ने अपनी दोस्ती तोड़ ली है। ऐसी स्थिति में एलजेपी के कद्दावर नेता रामविलास पासवान के निधन हो जाने से इसका प्रभाव पड़ना भी तय है। वहीं मना जा रहा है कि पार्टियों के मध्य होने वाली टक्कर बहुत कांटेदार होने वाली है। सभी पार्टियां अलग-अलग दावे जरूर कर रही हैं। लेकिन यदि हम बिहार के लोगों की बात करें तो उनके लिये आज तक सबसे बड़ा मुद्दा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोज़गार जैसे बुनियादी मुद्दें है। लेकिन वाहां की मौजूदा राज्य सरकार का ऐसा दावा है कि पिछले 15 वर्षों के दौरान बिहार का सालाना बजट सात गुना बढ़ोत्तरी हुई है जबकि इसका जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव दिखाई नही देती है। लोगों की स्वस्थ, इलाज, बच्चों की पढ़ाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के न मिलने के कारण लोग नौकरी या रोज़मर्रे की रोजी रोटी के लिये वहां से पलायन करने के लिये मजबूर है।

एक ओर जहां दुनिया आगे बढ़ रही है, वहीं हमारे देश का यह प्रदेश जहां था वहीं ठहरा हुआ है। जहां तक इस राज्य की विकास की बात करें तो आज भी यहां पर देश के अन्य राज्यों से ज्यादा अपराध प्रदूषण से लेकर गंदगी के मामले में सबसे ऊपर। जबकि बिहार सरकार प्रति वर्ष यही कहती रहती है कि बिहार पहले की अपेक्षा दुगनी गति से विकास पथ पर अग्रसर हैं वहीं पर यदि हम बिहार की प्रति व्यक्ति आय की बात करें तो बिहारी इस सूची में देश के अन्य राज्यों से सबसे आख़िरी पायदान पर खड़े नजर आते हैं। देश के अन्य राज्यों के मुक़ाबले यहां के लोगों की आय एक तिहाई है।
प्रत्येक वर्ष यहां के अनेको जिलों में आज भी बाढ़ आती है यहां के कुल 28 जिलें बाढ़ से प्रति वर्ष प्रभावित होते हैं। प्रत्येक वर्ष इन इलाकों के लाखों लोग अपने घर से बेघर होने पर मजबूर हैं। इस प्रदेश की शायद यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि देश के अन्य राज्यों से यह राज्य अभूतपूर्व खनिज संपदाओं से भरपूर होते हुये भी आज इक्कीसवीं सदी में भी यह देश के सबसे पिछड़े राज्यों में इसकी गिनती होती है।
कुल मिलाकर ऐसी दर्जनों मिसालें हैं, जो बिहार की दुर्दशा की ओर इशारा करती है। जबकि ऐसा भी नहीं है कि यहां राजनीतिक स्थिरता न हो। यहां पर पिछले 15 वर्षों से एक ही गठबंधन की सरकार सत्तासीन है।
देश के बिहार राज्य की स्थिति आज भी वैसी बनी हुई है जैसा कि देश की आजाद कालीन सन 1947 में हुआ करती थी। आज भी यहां विकास की गंगा बह नही पाई है, यहाँ अपराध चरम पर है। ऐसी स्थिति में यहां पर बीए-एमए से लेकर बीटेक तक की पढ़ाई के लिए और प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए विद्यार्थियों और लोगों को छोटी मोटी बीमारी से लेकर -बड़ी बीमारियों के इलाज करने तक के लिए देश के दूसरे हिस्से में जा कर रहना पड़ता है क्योंकि आज तक यहां अच्छे कॉलेजों एवं हॉस्पिटलों की आज भी अभूतपूर्व अभाव हैं।
वास्तव में यहाँ विकास तो हुआ है लेकिन कुछ व्यक्तिगत तौर पर ! जरुरत है ऐसे में सही सोच और बेहतर नेतृत्व वाले नेता कि जो बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए कुछ कर दे जो मिशाल बन जाये। वरना सत्ता तो आती है और चली जाती है लेकिन व्यक्ति विकास अपने आप ही करता है जैसे कि करता आया है हर रोज संघर्ष कर !







