संकट का दौर है ऐसे में दूसरी लहर की हवा ने सभी को मुश्किल में दाल रखा है। इस बीच बारिश ने प्रदेश में अपनी दस्तक दे दी है। बुधवार को रात लगभग आठ बजे तेज आंधी-बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया। कई स्थानों पर ओले भी गिरे। लखनऊ के काकोरी, माल और मलिहाबाद में आम के बागवानों का बड़ा नुकसान हुआ।

राजधानी के कई इलाकों में पेड़ों की टहनियां टूट कर सड़क पर बिखर गईं जिससे यातायात बाधित हुआ। पूरे प्रदेश में आंधी-पानी और आकाशीय बिजली से पांच लोगों की मौत हो गई। दरअसल बादलों की आवाजाही पिछले कई दिनों से बनी हुई है। मौसम विभाग ने बूंदाबांदी के आसार व्यक्त किए थे। बुधवार को भी दिनभर बादलों की आवाजाही रही। गुरुवार को जबरदस्त बारिश हुयी रात लगभग आठ बजे अचानक तेज हवाएं चलने लगीं। इसके कुछ ही देर बार तेज बारिश शुरू हो गई। लगभग बीस मिनट तेज बारिश हुई। और आज शुक्रवार यानि ईद के मौके पर सुबह सुबह फिर मौसम बदला और बारिश हुयी। उससे शाम को उमस वाली गर्मी का अहसास हुआ। जाहिर है कि मौसम की इस करवट से लोगों को खासी दिक्कत हुई और उनका रूटीन गड़बड़ा गया। दूसरी ओर इस बारिश से फसलों को नुकसान भी बताया जा रहा है।

खासतौर से आम व सब्जी की फसलों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा पेड़ गिरने व जलभराव से होने से आवागमन ठप हो गया। वैसे भी मई के मध्य का महीना है और अब ऐसे ही छिटपुट रूप से बारिश का सिलसिला चलता रहेगा जो मॉनसून के सक्रिय होने तक पूरी तरह से जारी रहेगा। ऐसे में इससे बचाव के कदम उठा लिए जाने चाहिए। नालों और नालियों की सफाई का काम युद्धस्तर पर कराया जाना चाहिए ताकि जलभराव की स्थितियां न पैदा हो सकें। इसके अलावा बाढ़ को लेकर भी तैयारियां कर ली जानी चाहिए ताकि अनावश्यक अनिष्ट से लोगों को बचाया जा सके तथा बारिश से होने वाली क्षति को न्यूनतम किया जा सके।







