टीवी सीरियलों के दर्शकों के लिए सुरेखा सीकरी बालिका वधू की दादी सा थीं। उस किरदार ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया था। इसकी बदौलत अपार लोकप्रियता के साथ-साथ उन्हें कई पुरस्कार, सम्मान आदि भी मिले। आयुष्मान खुराना, सानिया मल्होत्रा, नीना गुप्ता, गजराज राव की बेहद सफल फिल्म ‘बधाई हो’ में मध्यवर्गीय परिवार की बुज़ुर्ग मां के किरदार में शानदार अदाकारी के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इससे पहले तमस और मम्मो के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके थे।
रंगमंच की अद्वितीय अभिनेत्री रहीं सुरेखा सीकरी ने तमस , परिणति , सलीम लंगड़े पे मत रो, मम्मो, ज़ुबैदा, सरदारी बेगम, नसीम में यादगार काम किया है। आमिर ख़ान की फिल्म सरफरोश में बहुत छोटी सी भूमिका में भी सुरेखा सीकरी याद रह जाती हैं।
यू ट्यूब पर उनका एक वीडियो है। फ़ैज़ की मशहूर नज़्म पढ़ते हुए- मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग। आवाज़ के उतार-चढ़ाव और चेहरे के भावों के माध्यम से उन्होंने इस नज़्म के वाचन में जादुई असर पैदा कर दिया है। आख़िरी शॉट तो कमाल है। सुरेखा सीकरी, मनोहर सिंह, उत्तरा बावकर का दौर हिंदी रंगमंच का सुनहरा समय था। मेरा सौभाग्य रहा कि इन हस्तियों को साक्षात् देखने, मिलने, बात करने का मौक़ा मिला। सुरेखा जी का जाना उस शानदार दौर के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है।
- अमिताभ श्रीवास्तव







