एजुकेट गर्ल्स के लगभग 5,800 टीम बालिका स्वयंसेवक अब हैश टैग यंग वारियर पहल का हिस्सा
मुंबई, 06 अगस्त, 2021: लड़कियों की शिक्षा के माध्यम से लिंग और साक्षरता के अंतर को कम करने के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के गांवों में काम करने वाली गैर-लाभकारी संस्था एजुकेट गर्ल्स, कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हैश टैग यंग वारियर पहल में शामिल हो गई है। बता दें कि एजुकेट गर्ल्स के लगभग 5800 टीम बालिका स्वयंसेवकों ने 18 से 30 वर्ष की आयु के बीच युवा योद्धाओं के रूप में पंजीकरण कराया है और अपने गांवों और समुदायों में सकारात्मक काम करने के लिए अपना समर्थन देने का वचन दिया है।
कोविड राहत पहल के रूप में, एजुकेट गर्ल्स संस्था ने टीम बालिका और उनके 2,200 कर्मचारियों की मदद से भारत के सुदूर गांवों में 1,15,000 से अधिक अति-गरीब परिवारों को राशन और स्वच्छता किट वितरित किया है । 15,000 से अधिक टीम बालिका स्वयंसेवकों ने लड़कियों को शिक्षित करने में सहायता कर के यह सुनिश्चित किया कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण गांवों के 2,30,600+ बच्चे समुदाय आधारित शिक्षण पहल कैंप विद्या के माध्यम से शिक्षा से जुड़े रहें।
एजुकेट गर्ल्स की संस्थापक और कार्यकारी निदेशक, सफीना हुसैन ने सहकार्यता पर विस्तार से कहा, “हमारी टीम बालिका स्वयंसेवक अपने समुदायों और उन बच्चों के समर्थन में अग्रिम स्तर में काम कर रही हैं, जिनके साथ हम महामारी के दौरान काम करते हैं। वे बच्चे शिक्षा से जुड़े रहें और कोविड -19 के प्रत्यक्ष प्रभावों से सुरक्षित रहें ये सुनिश्चित कर रहे हैं । ग्रामीण भारत में सबसे अधिक उपेक्षित समुदायों और कमजोर बच्चों का समर्थन करते हुए, हमारी टीम बालिका स्वयंसेवक पहल में शामिल हो रही है।”
यूनिसेफ इंडिया की चीफ ऑफ जेनरेशन अनलिमिटेड (यूवाह), यूथ डेवलपमेंट एंड पार्टनरशिप, सुश्री धुवाराखा श्रीराम ने कहा, “अगर हम युवाओं को सही समर्थन करते हैं, तो वे भारत में कोविड-19 अवस्था को बदल सकते हैं। आंदोलन का उद्देश्य देश के सभी हिस्सों के युवाओं को शामिल करना है। फोन और इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए, हमने एक साधारण चैटबॉट विकसित किया है, जो कोविड-19 से लड़ने से संबंधित कार्यों को जारी करता है। बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले लोग आईवीआर नंबर पर मुफ्त मिस्ड कॉल दे सकते हैं।







