यह सही है कि दुनिया बड़ी तेजी के साथ विकास कर रही है लेकिन यह भी सही है कि इसके साथ तमाम दिक्कतें भी उसके सामने हैं। ये दिक्कतें अपने आप भी पैदा होती हैं और कुछ खास किस्म के लोगों द्वारा उत्पन्न भी की जाती हैं। यही कारण है कि विश्व के तमाम देशों के सामने कई तरह की समस्याएं भी हैं। इसके पीछे संकुचित सोच ही जिम्मेदार है।
ऐसा नहीं है कि इन समस्याओं का समाधान नहीं हो लेकिन इसके लिए लोग तैयार नहीं होते हैं। इस मामले में पीएम मोदी का यह कथन सही है कि आधुनिक विश्व की ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान सैकड़ो वर्ष पहले दिए गए बुद्ध के उपदेशों में न हो !
आज दुनिया जिस युद्ध और अशांति से पीड़ित है, उसका समाधान बुद्ध ने सदियों पहले दे दिया था। उन्होंने यूक्रेन- रूस युद्ध, मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चिंताओं को इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती करार दिया।
उन्होंने कहा कि आज समय की मांग है कि प्रत्येक राष्ट्र की प्राथमिकता अपने देश के हित के साथ ही विश्व हित भी हो। दरअसल यह बात अपने आप में सही है कि जब तक विश्व बंधुत्व की भावना से सभी देश काम नहीं करेंगे तब तक संबंधों में सामान्यता नहीं आएगी।
इसीलिए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें विश्व को सुखी बनाना है तो स्व से निकल कर संसार, संकुचित सोच को त्याग कर, समग्रता का यह बुद्ध मंत्र ही एकमात्र रास्ता है। सभी को अपने आसपास गरीबी से जूझ रहे लोगों के बारे में और साथ ही संसाधनों के अभाव में फंसे देशों के बारे में सोचना होगा। एक बेहतर और स्थिर विश्व की स्थापना के लिए यही एक मार्ग है। आज यह समय की मांग है कि हर व्यक्ति की, हर राष्ट्र की प्राथमिकता अपने देश के हित के साथ ही विश्व हित भी हो।
पीएम ने कहा कि यह बात सर्व स्वीकार्य है कि आज का यह समय सबसे चुनौतीपूर्ण समय है। आज एक ओर महीनों से दो देशों में युद्ध चल रहा है तो वहीं दुनिया आर्थिक अस्थिरता से भी गुजर रही है।







