उत्तराखंड में देहरादून-ऋषिकेश मार्ग को फोरलेन बनाने के नाम पर 3000 से 4000 पेड़ काटे जा रहे हैं। घने जंगलों वाले इस इलाके में वन्य जीव-जंतु भी रहते हैं। वन विभाग अब पुलिस की मदद से पेड़ कटान का काम चला रहा है, ताकि कोई रोक-टोक न हो सके।
जनता का विरोध तेज
इस पेड़ कटान के खिलाफ स्थानीय संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और आम लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ऋषिकेश और भनियावाला क्षेत्र में प्रदर्शन जारी हैं। एक महिला ने तो विरोध स्वरूप मुंडन आंदोलन शुरू कर दिया है जैसे बाल मुड़वाकर अपनी नाराजगी जताई। यह इशारा साफ है कि लोग अब चुप रहने को तैयार नहीं हैं।
लोग बोले पेड़ कटवाकर विकास नहीं चाहिए
सड़क चौड़ीकरण की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता। बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन और आर्थिक विकास के लिए अच्छी सड़कें जरूरी हैं। लेकिन क्या विकास का मतलब हमेशा जंगलों को काटना ही है? क्या पर्यावरण और वन्य जीवों की कीमत पर ही प्रगति संभव है?
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में जंगलों का महत्व सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है। ये जंगल भूस्खलन रोकते हैं, जल स्रोत बचाते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं। हजारों पेड़ काटने का फैसला कितना सोचा-समझा है?
https://x.com/Dr_MonikaSingh_/status/2078485435790295256/video/1
एक्सपर्ट कमेंट : “यह विकास नहीं, पर्यावरणीय आत्महत्या है।”
पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पेड़ काटना बेहद खतरनाक है। उत्तराखंड पहले ही भूस्खलन, बाढ़ और जल संकट से जूझ रहा है। हजारों पेड़ काटने से न सिर्फ जैव विविधता नष्ट होगी, बल्कि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। अगर सरकार को सड़क चौड़ी करनी ही है तो वैकल्पिक डिजाइन, न्यूनतम पेड़ कटान और वृक्षारोपण का बाध्यकारी प्लान होना चाहिए। बिना सोचे-समझे जंगल उजाड़ना विकास नहीं, सिस्टेमेटिक पर्यावरण अपराध है।
विकास जरूरी है, लेकिन जंगलों की कीमत पर नहीं
लोगों का यह जागरण सकारात्मक है। पेड़ बचाने के लिए सड़कों पर उतरना अच्छा है, लेकिन यह जागरूकता अब भ्रष्टाचार, अनियोजित विकास और लंबे समय के पर्यावरणीय नुकसान पर भी बनी रहनी चाहिए। विकास जरूरी है, लेकिन जंगलों की कीमत पर नहीं।
सरकार को अभी भी समय है कि अपनी नीति पर पुनर्विचार करे, वरना आने वाली पीढ़ियां सिर्फ सड़कें नहीं, जंगलों की कमी भी याद रखेंगी।
https://x.com/Sachingupta/status/2078370019722035503/video/1
सकारात्मक संकेत
सबसे अच्छी बात यह है कि लोग अब बिना डरे सवाल पूछ रहे हैं। जो लोग सालों से चुप थे, वे आज पेड़ बचाने के लिए सड़क पर हैं। यह जागरण स्वागत योग्य है। अगर यही जागरूकता भ्रष्टाचार, अनियोजित विकास और पर्यावरण नीतियों पर भी बनी रही, तो आने वाला समय बेहतर हो सकता है।
विकास आवश्यक है, लेकिन टिकाऊ विकास और भी जरूरी है। सरकार को चाहिए कि पेड़ कटान को न्यूनतम रखे, वैकल्पिक डिजाइन पर विचार करे और स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुने। पेड़ कटते देखकर अगर जनता जाग रही है, तो यह उत्तराखंड के लिए अच्छा संकेत है।
बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात
उत्तराखंड की रहने वाली मानवी ने देहरादून-ऋषिकेश हाईवे परियोजना के लिए करीब 4 हजार पेड़ों की कटाई के विरोध में अपना मुंडन करा लिया !!
उन्होंने पेड़ों की कटाई का खुलकर विरोध किया और सरकार से इसे रोकने की मांग की. उनका वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए. बढ़ते विरोध के बीच उत्तराखंड सरकार ने फिलहाल पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है…।
फ़िलहाल अब देखना यह है कि यह जागरण कितना गहरा और कितना लंबा चलता है।






