लखनऊ, 05 फरवरी: पीलीभीत में बाघ के दीवार पर चढ़कर बैठे होने का वीडियो वाइरल हुआ तो लोग दहशत में आ गए। अब एक बार फिर इसी तरह से उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर क्षेत्र में घूम रहे बाघ व तेंदुए की दहशत बनी हुई है। लोग अपने घरों से बाहर निकलने में फूंक -फूंक कर कदम रख रहे हैं। फिलहाल दो दिनों से कोई नए पगचिह्न नहीं मिले हैं। डर के मारे लोग बच्चों को स्कूल भेजने में कतरा रहे हैं, किसान खेतों की रखवाली नहीं कर पा रहे हैं।
कसमंडा और बिसवां तहसील की सीमा पर दो दिन पहले तेंदुए के पगचिह्न देखने को मिले थे। इसके बाद वन विभाग ने कांबिंग शुरू की। हालांकि दो दिन से कोई नहीं पगचिह्न नहीं मिले हैं। इस वजह से किसान हैं कि बाघ व तेंदुआ कहीं आसपास ही हैं। यहां के रेवा, सरैंया बलदेव सिंह, भगंतापुर, ढौकलगंज, कंदुनी गांव में लोग देर रात मचानों पर बैठकर खेतों की रखवाली से गुरेज कर रहे हैं।
गावं के रामलोटन व अषोक ने बताया कि वह सभी लोग मवेषियों से अपने खेतों को बचाने के लिए रात में मचानों पर रहकर रखवाली करते थे। लेकिन जब से जंगली जानवर की हलचल हुई है, खेत जाने से भी डर लगता है। बच्चे खेल नहीं पा रहे हैं। स्कूल झुंड में जाना पड़ता है। यही हाल गोंदलामऊ क्षेत्र का भी है। बाघ की हलचल न होने से यहां पर वनविभाग की टीम शनिवार को कांबिंग करने नहीं गई। लेकिन लोगों ने जंगलों की ओर अपने मवेशियों को चराने के लिए भेजना बंद कर दिया है। उनका कहना है कि बाघ वैसे तो दिन में खेतों में छिपा रहता है। लेकिन वह रात में शिकार कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वन दरोगा नीरज ने बताया कि दो दिनों से कही पर भी नए पगचिह्नन होने के चलते कांबिंग नहीं की गई है।







