मेड इन दाहोद, 9000 HP का शक्तिशाली लोकोमोटिव
भारतीय रेलवे ने एक बार फिर अपनी तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षमता का लोहा मनवाया है। गुजरात के दाहोद में निर्मित 9000 हॉर्स पावर (HP) का “बाहुबली” इंजन देश का पहला ऐसा लोकोमोटिव है, जो न केवल माल ढुलाई की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल का एक शानदार उदाहरण भी है। इस इंजन को “मेड इन दाहोद” का टैग दिया गया है, जो गुजरात के दाहोद में बने रेलवे प्रोडक्शन यूनिट की मेहनत और तकनीकी कौशल को दर्शाता है। आइए, इस इंजन की विशेषताओं और महत्व पर विस्तार से नजर डालते हैं।
इंजन की प्रमुख विशेषताएं
शक्तिशाली 9000 HP की क्षमता: यह इंजन 9000 हॉर्स पावर का है, जो भारतीय रेलवे के मौजूदा 6000 HP इंजनों से कहीं अधिक शक्तिशाली है। यह 4600 टन वजनी डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से खींच सकता है।
इसकी उच्च शक्ति के कारण यह माल ढुलाई की गति और क्षमता को दोगुना करने में सक्षम है, जिससे रेलवे की लॉजिस्टिक्स दक्षता में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
आधुनिक तकनीक और सुविधाएं:
रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम: यह इंजन ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से लैस है, जो ब्रेकिंग के दौरान ऊर्जा को पुनर्जनन करता है, जिससे पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।
लोको पायलट के लिए सुविधाएं: पहली बार भारतीय रेलवे के किसी इंजन में चालक के लिए एयर कंडीशनिंग (AC) और शौचालय की सुविधा शामिल की गई है। इससे लंबी दूरी की यात्रा के दौरान लोको पायलट्स को आराम और सुविधा मिलेगी।
सुरक्षा प्रणाली: दुर्घटनाओं से बचाव के लिए इस इंजन में उन्नत कवर सिस्टम लगाया गया है, जो सुरक्षा को और बढ़ाता है।
हल्का और एयरोडायनामिक डिजाइन:
इस इंजन को कम वजन और एयरोडायनामिक डिजाइन के साथ बनाया गया है, जिससे यह उच्च गति पर भी स्थिर और ऊर्जा-कुशल रहता है।
मेड इन दाहोद: इस इंजन पर “मैन्युफैक्चरिंग बाय दाहोद” लिखा गया है, जो दाहोद रेलवे प्रोडक्शन यूनिट की उपलब्धि को दर्शाता है। यह इंजन पूरी तरह से मेक इन इंडिया पहल के तहत निर्मित है और इसे जर्मन कंपनी सीमेंस के सहयोग से बनाया गया है।
दाहोद रेलवे प्रोडक्शन यूनिट: लागत 20,000 करोड़ रुपये
स्थापना और निवेश: दाहोद में 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह रेलवे प्रोडक्शन यूनिट सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित है। इसका शिलान्यास 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
उत्पादन लक्ष्य: अगले 10 वर्षों में इस यूनिट में 1200 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव इंजनों का निर्माण किया जाएगा। वर्तमान में 4 इंजन तैयार किए जा चुके हैं, और भविष्य में इनका निर्यात भी किया जाएगा।
रोजगार सृजन: इस प्रोजेक्ट से दाहोद और आसपास के क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 10,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगा और पावर सेक्टर, इंजीनियरिंग सेक्टर की छोटी-बड़ी कंपनियों के लिए आपूर्ति के अवसर पैदा करेगा।
माल ढुलाई में क्रांति:
यह इंजन मुख्य रूप से पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) और अन्य महत्वपूर्ण मालवाहक खंडों पर उपयोग किया जाएगा। यह 4600 टन तक के कार्गो को आसानी से ढो सकता है, जिससे रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में भारी वृद्धि होगी।
इसकी उच्च गति और शक्ति के कारण मालगाड़ियों की औसत गति बढ़ेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स और व्यापार प्रणाली को गति मिलेगी।
मेक इन इंडिया और मेक फॉर वर्ल्ड:
यह इंजन न केवल भारत की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि इसे अफ्रीका और यूरोप जैसे देशों में निर्यात करने की योजना है। कई देशों ने इस इंजन में रुचि दिखाई है, जो भारत की वैश्विक रेलवे मानचित्र पर बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
पर्यावरणीय स्थिरता:
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम और इलेक्ट्रिक तकनीक के उपयोग से यह इंजन डीजल इंजनों की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल है। यह भारतीय रेलवे की 100% विद्युतीकरण योजना का हिस्सा है।
आर्थिक विकास:
दाहोद में इस प्रोजेक्ट के कारण स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। यह क्षेत्र रेलवे इंजन निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बनने की राह पर है।
उद्घाटन और भविष्य की योजनाएं
प्रधानमंत्री का दौरा: 26 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दाहोद में इस इंजन का उद्घाटन किया और इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने दाहोद रेलवे प्रोडक्शन यूनिट का भी दौरा किया।
निर्यात की संभावनाएं: भविष्य में इन इंजनों को वैश्विक बाजार में निर्यात करने की योजना है, जिससे भारत रेलवे लोकोमोटिव निर्माण में वैश्विक लीडर के रूप में उभरेगा।
फ्रांस जैसे देशों की श्रेणी में ला खड़ा दाहोद ने
- पहले के इंजन: भारतीय रेलवे ने पहले 12000 HP का इंजन मधेपुरा, बिहार में बनाया था, लेकिन वह ट्विन-सेक्शन लोकोमोटिव था, जिसमें दो इंजन शामिल थे। “बाहुबली” इंजन सिंगल-सेक्शन लोकोमोटिव है, जो एक ही इंजन में डबल इंजन की ताकत प्रदान करता है।
- अन्य देशों के साथ तुलना: भारत अब उन छह देशों में शामिल है, जो उच्च हॉर्स पावर के इंजन बना सकते हैं। यह उपलब्धि भारत को रूस, चीन, जर्मनी, स्वीडन और फ्रांस जैसे देशों की श्रेणी में ला खड़ा करती है।
वास्तव में “बाहुबली” इंजन भारतीय रेलवे की तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह न केवल माल ढुलाई की क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता, रोजगार सृजन और वैश्विक निर्यात में भी योगदान देगा। दाहोद में निर्मित यह इंजन “मेक इन इंडिया” और “मेक फॉर वर्ल्ड” के दृष्टिकोण को साकार करता है। भारतीय रेलवे के इस नए युग में “बाहुबली” इंजन एक मील का पत्थर साबित होगा, जो देश की रेलवे प्रणाली को और मजबूत बनाएगा।







