संतवाणी : अजीत कुमार सिंह
शास्त्रों से ले कर लोक तक, शिव के असँख्य स्वरुप दिखते हैं दुर्दांत राक्षसों का अंत करते महायोद्धा शिव, सहजता से प्रसन्न हो कर सब कुछ दे देने वाले कृपालु भोलेनाथ शिव, छोटी छोटी बातों पर रूठ जाने वाली अर्धांगिनी को मनाते रहने वाले भोले पति शिव, माता सती की मृत्यु के बाद उनके शव को कंधे पर उठा कर पागलों की तरह चीखते-चिल्लाते विलाप करते शिव, और कभी युगों तक स्वयं को संसार और संसारिकता से दूर रह कर शांत पड़े रहते तपस्वी शिव पर इन समस्त रूपों में मुझे समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को अपने कंठ में उतारते शिव का स्वरूप सबसे अधिक प्रभावित करता है उनका वह स्वरूप समस्त पौराणिक इतिहास का सबसे भव्य और विराट स्वरूप है, ऐसा भव्य उदाहरण समूची सृष्टि में अन्यत्र कहीं नहीं।
मृत्यु होना निश्चित है यह विधि का विधान है लेकिन यदि व्यक्ति भगवान् शिव की तरह प्रत्येक जीव की रक्षा के लिए विष पीने का अदम्य साहस उठा ले तो उसे भगवान् शिव का आशीर्वाद प्रदान होता है। उसके बाद उसका शरीर भले ही ख़त्म हो जाये लेकिन उसके व्यक्तित्व का नाश नहीं होता है।
यह विधि का विधान है लेकिन यदि व्यक्ति भगवान् शिव की तरह प्रत्येक जीव की रक्षा के लिए विष पीने का अदम्य साहस उठा ले तो उसे भगवान् शिव का आशीर्वाद प्रदान होता है। उसके बाद उसका शरीर भले ही ख़त्म हो जाये लेकिन उसके व्यक्तित्व का नाश नहीं होता है। अर्थात वे माता शक्ति को अपने से अगल व्यक्ति नहीं मानते उन्हें अपने शरीर का ही आधा हिस्सा मानते हैं शक्ति के बिना शिव शव हैं क्या यह स्त्री सम्मान का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण नहीं? माता पार्वती भी उतनी ही शक्तिशाली हैं जितने स्वयं शिव हैं वे शिव के समान ही करुणामयी हैं और शिव के समान ही महान योद्धा भी।
शिव पार्वती की रक्षा करते हैं, पार्वती शिव की रक्षा करती हैं माता पार्वती शिव के शरीर का आधा हिस्सा हैं, किन्तु इससे उनका स्वतंत्र अस्तित्व तनिक भी प्रभावित नहीं होता वे लोक में शक्ति की देवी के रूप में स्वतंत्र रूप से पूजी जाती हैं प्रत्येक शिव मंदिर के पास माता का भी मन्दिर होता है, पर माता की हर पिंडी के पास शिव का मंदिर आवश्यक नहीं स्त्री स्वतंत्रता का सृष्टि में इससे सुन्दर उदाहरण और कहीं नहीं शिव एक सद्गृहस्थ की भांति जीवन जीने वाले देव हैं एक सामान्य सा उनका भी परिवार है, जिसमें उनके अतिरिक्त उनकी पत्नी हैं और दो पुत्र हैं पुत्र सदैव रूठे ही रहते हैं नागरी जीवन से दूर एकान्त पर्वत पर उनका परिवार संसाधन विहीन जीवन जीता है कोई तड़क-भड़क नहीं, कोई अनावश्यक चमक नहीं सोच कर देखिये तो, प्राचीन काल से यही सामान्य भारतीय जीवन शैली रही है इसीलिए लोक को भगवान शिव अपने से लगते हैं शिव परिवार भारतीय लोक का आदर्श परिवार है।







