मुंबई, 25 अगस्त 2025 (अनिल बेदाग): मुंबई के प्रतिष्ठित लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में रविवार शाम बॉलीवुड के प्रसिद्ध सूफी और भक्ति गायक राघव कपूर ने अपने नए संगीत समूह ‘रागीफाई’ (आत्मा की ध्वनि) का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में तीन घंटे तक चली संगीतमय प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘रागीफाई’ ने पारंपरिक, सूफी और समकालीन गीतों के मिश्रण के साथ भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत को आधुनिक रंग में पेश किया।
संगीतमय प्रस्तुति और सहयोगी कलाकार
‘रागीफाई’ की पहली प्रस्तुति में राघव कपूर के नेतृत्व में उनकी टीम ने पुराने और नए गीतों का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। वायलिन पर संजीव राव और परक्यूशन पर श्याम एडवांकर जैसे दिग्गज संगीतकारों ने अपनी कला का जादू बिखेरा। कीबोर्ड पर ऋतिक भटकर, गिटार पर योगेश मोथे, संतूर पर हर्ष गायकवाड़, तबले पर अकीद जब्बार खान और ड्रम पर मितुल अजमेरी ने भी शानदार प्रदर्शन किया। गायिका सुमन यादव, ध्याना मेहता और मीरा पारिख की मधुर आवाजों ने संगीत संध्या को और भी यादगार बना दिया। कार्यक्रम में सूफी और भक्ति संगीत के साथ-साथ आधुनिक मेलोडी का समावेश देखने को मिला, जिसने दर्शकों को भारतीय संगीत की विविधता का अनुभव कराया। हालांकि, कुछ दर्शकों ने महसूस किया कि नए गीतों की तुलना में पारंपरिक गीतों को अधिक समय दिया जा सकता था, ताकि भारतीय संगीत की जड़ों को और गहराई से उभारा जा सके।
विशेष अतिथि और आयोजन का प्रबंधन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसीपी संजय पाटिल, शोथीम प्रोडक्शन के निदेशक संजीव कुमार, और स्वदेश न्यूज के महाराष्ट्र व गोवा ब्यूरो प्रमुख व अभिनेता आशीष चटर्जी उपस्थित थे। आयोजन को अंबिका म्यूजिक ज़ोन का समर्थन प्राप्त था, जबकि प्रोडक्शन, स्टेज और साउंड का प्रबंधन धाना साउंड ने किया। वीडियो प्रबंधन अदजान और मेजबानी मेधा अंतानी ने संभाली।
रागीफाई’ भविष्य में देश भर में संगीत कार्यशालाएं और लाइव प्रदर्शन आयोजित करेगा
राघव कपूर ने ‘रागीफाई’ के शुभारंभ पर कहा, “यह समूह भारतीय संगीत की आत्मा को जीवंत करने और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। हमारा उद्देश्य पारंपरिक और आधुनिक संगीत का संतुलन बनाए रखना है।” उन्होंने यह भी बताया कि ‘रागीफाई’ भविष्य में देश भर में संगीत कार्यशालाएं और लाइव प्रदर्शन आयोजित करेगा, ताकि स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जा सके। हालांकि, कुछ संगीत प्रेमियों ने सुझाव दिया कि ‘रागीफाई’ को क्षेत्रीय और लोक संगीत पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि भारत की सांस्कृतिक विविधता को और व्यापक रूप से दर्शाया जा सके। इसके अलावा, आयोजन में तकनीकी व्यवस्था में मामूली देरी की शिकायतें भी सामने आईं, जिन्हें भविष्य में सुधारा जा सकता है।
पारंपरिक संगीत को आधुनिक मंच पर लाने की कोशिश
‘रागीफाई’ का शुभारंभ भारतीय संगीत के प्रति उत्साह और समर्पण का प्रतीक है। यह समूह न केवल बॉलीवुड और सूफी संगीत को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि पारंपरिक संगीत को आधुनिक मंच पर लाने की कोशिश भी कर रहा है। हालांकि, इसे और समावेशी बनाने के लिए क्षेत्रीय और लोक संगीत को शामिल करना और तकनीकी व्यवस्थाओं में सुधार करना महत्वपूर्ण होगा।
राघव कपूर का ‘रागीफाई’ भारतीय संगीत की आत्मा को नए रंग में पेश करने का एक सराहनीय प्रयास है। इस शानदार शुरुआत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया और भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जगाई। यह समूह भारतीय संगीत की विविधता को सहेजने और इसे वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, बशर्ते यह सभी सुझावों को ध्यान में रखकर अपनी प्रस्तुतियों को और समृद्ध करे।







