WSJ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: रियाद ट्रंप प्रशासन पर प्राइवेट दबाव बढ़ा रहा
नई दिल्ली : सऊदी अरब ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दे दी है “होर्मुज की नाकाबंदी तुरंत हटाओ, वरना पूरा खाड़ी क्षेत्र तेल से सूख जाएगा!”वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रियाद ट्रंप प्रशासन पर प्राइवेट दबाव बढ़ा रहा है कि ईरान के खिलाफ लगाई गई ब्लॉकेड हटा ली जाए। वजह बेहद गंभीर है अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हूतियों के जरिए बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य बंद कर दिया, तो सऊदी अरब का आखिरी बचा हुआ तेल एक्सपोर्ट रूट भी खत्म हो जाएगा। दोनों चोकपॉइंट एक साथ बंद होने का मतलब है खाड़ी का कोई भी तेल दुनिया के बाजार तक नहीं पहुंच पाएगा। इसी बीच ट्रंप को चीन से भी तगड़ा झटका लगा है, जबकि स्पेन के साथ व्यापार संबंध तोड़ने की धमकी पर शी जिनपिंग ने खुलकर अमेरिका के खिलाफ अपना रुख साफ कर दिया। तो क्या ट्रंप की आक्रामक रणनीति अब खुद सऊदी अरब और वैश्विक तेल बाजार को संकट में डाल रही है?
ईरान के साथ तनाव बढ़ने पर सऊदी अरब का अपना तेल निर्यात खतरे में
वाल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब अमेरिकी ब्लॉकेड बिल्कुल नहीं चाहता। रियाद ने ट्रंप प्रशासन से सीधे कहा है कि ईरान के खाड़ी में तेल सप्लाई का एकमात्र रास्ता बंद करने से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी तुरंत हटा लें। सऊदी प्राइवेट तौर पर वॉशिंगटन पर दबाव बना रहा है कि ब्लॉकेड हटाकर बातचीत की मेज पर लौटें।
दोनों चोकपॉइंट बंद हुए तो खाड़ी का पूरा तेल बाजार में नहीं पहुंच पाएगा
कारण बेहद साफ है। अगर ईरान हूतियों को एक्टिवेट करके बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य बंद कर देता है तो सऊदी अरब अपना आखिरी बचा हुआ एक्सपोर्ट रूट भी खो देगा। युद्ध के बाद जब होर्मुज बंद हुआ था, तब सऊदी ने अपने तेल एक्सपोर्ट को लाल सागर की तरफ यानबू पोर्ट की ओर मोड़ दिया था। इससे उसका उत्पादन युद्ध-पूर्व स्तर यानी 70 लाख बैरल प्रतिदिन पर वापस पहुंच गया था। लेकिन अब दोनों रास्ते बंद होने का मतलब है – खाड़ी का कोई भी तेल बाजार तक नहीं पहुंच पाएगा।
ईरान की खुली चेतावनी: बाब अल-मंडेब को होर्मुज जैसा ही देखते हैं

ईरान के विदेश नीति सलाहकार ने सबके सामने चेतावनी दी है कि तेहरान बाब अल-मंडेब को “ठीक वैसे ही” देखता है जैसे वह होर्मुज को देखता है। उन्होंने कहा कि “एक ही सिग्नल” से इसे बंद कर दिया जाएगा। सऊदी एनर्जी अधिकारियों ने WSJ को बताया कि उन्होंने हूतियों से वादा लिया है कि वे बाब अल-मंडेब रूट पर सऊदी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे। लेकिन रियाद ने वॉशिंगटन को साफ चेतावनी दी है कि स्थिति “फ्लूइड” है। अगर ईरान और दबाव बढ़ाता है तो हूती और आक्रामक हो सकते हैं।
अमेरिकी ब्लॉकेड ईरान के राजस्व को रोकने के लिए, लेकिन सऊदी राजस्व भी दांव पर
अमेरिका ने यह नाकाबंदी ईरान के राजस्व को रोकने के मकसद से लगाई है। लेकिन ईरान अपने यमनी प्रॉक्सी (हूतियों) के जरिए सऊदी अरब के राजस्व को रोककर जवाब दे सकता है। दोनों चोकपॉइंट एक साथ बंद होने पर ग्लोबल तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी।
ट्रंप को चीन से ज़बरदस्त झटका, स्पेन के साथ व्यापार संबंध तोड़ने की धमकी पर शी जिनपिंग का पलटवार
इसी बीच ट्रंप को अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर बड़ा झटका लगा। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ नहीं दिया तो ट्रंप ने धमकी दी – “हम स्पेन के साथ सभी व्यापारिक संबंध तोड़ देंगे।” ठीक 36 घंटे बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तीखा जवाब दिया:
“स्पेन इतिहास के सही पक्ष में खड़ा है, यह बहुत समझदार देश है। चीन स्पेन के साथ खड़ा है। हम विश्व शांति के लिए काम करेंगे और जंगल के कानून का विरोध करेंगे।”

ट्रंप का होर्मुज नाकाबंदी आदेश, लेकिन चीनी टैंकर नाकाबंदी तोड़कर निकल गया
ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकाबंदी का आदेश दिया था। चीन ने पहले ही चेतावनी दी थी “हमारे तेल मार्गों से खिलवाड़ मत करो।” इसके बावजूद एक प्रतिबंधित चीनी सहयोगी टैंकर अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद होर्मुज पार कर गया। सवाल उठने लगा है कि तो क्या ट्रंप ने फिर आत्मसमर्पण कर दिया?
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तेल की जंग अब ग्लोबल शांति और अर्थव्यवस्था को चुनौती दे रही
सऊदी अरब की चेतावनी और चीन-स्पेन का मजबूत रुख दिखाता है कि अमेरिकी ब्लॉकेड की रणनीति अब उल्टी पड़ रही है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप प्रशासन होर्मुज ब्लॉकेड पर क्या फैसला लेता है – क्योंकि दोनों चोकपॉइंट बंद होने पर न सिर्फ सऊदी-अमेरिका, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की कीमत चुकानी पड़ सकती है।






