लखनऊ : बैंकों में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह (5-day banking) लागू करने की पुरानी मांग को लेकर बैंककर्मियों का आंदोलन एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। केंद्र सरकार अभी तक इस मांग को मानने को तैयार नहीं हुई, जिसके विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने वर्क टू रूल आंदोलन पुनः शुरू कर दिया है।
बैंककर्मियों की मुख्य मांगें
- बैंकों में 5 दिवसीय बैंकिंग (शनिवार को छुट्टी) तुरंत लागू की जाए।
- स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए मनमाने ढंग से लागू किए गए PLI (Performance Linked Incentive) को वापस लिया जाए।
- सुलह प्रक्रिया की अवहेलना बंद हो।
यूनाइटेड फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ महीने पहले चले लंबे संघर्ष और 27 जनवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बावजूद सरकार ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। अब बाध्य होकर बैंककर्मी फिर से सख्त रुख अपनाने को मजबूर हैं।
आज क्या हुआ?
आज तीसरे शनिवार को सभी बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने काला फीता (काला रिबन) बांधकर अपना विरोध दर्ज किया और नियमित कार्य किया।
आगे के संघर्ष कार्यक्रम
- 2 मई (प्रथम शनिवार): सभी बैंक कर्मी काला बैज लगाकर काम करेंगे।
- 16 मई (तीसरा शनिवार): सभी पदाधिकारी और एक्टिविस्ट काले वस्त्र पहनकर विरोध प्रदर्शित करेंगे।
- सभी शाखाओं से CLC, IBA और DFS को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
- आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स से बाहर निकलना, शाम 6 बजे के बाद फोन न उठाना, कोई अतिरिक्त सहयोग न करना।
फोरम के मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आगे बड़े आंदोलनात्मक कार्यक्रम और हड़ताल की भी तैयारी है।
बैंककर्मी अब सख्ती से कह रहे हैं “5 दिन काम, 2 दिन आराम” उनका हक है। केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन पर दबाव बढ़ाने के लिए यह संघर्ष और तेज होने वाला है।







