मदरसों की जगह सरस्वती शिशु मंदिर ने ली प्रारंभिक शिक्षा
वाराणसी, 04 नवम्बर। देश में जहां गौरक्षा के नाम पर हिंसा और राजनीति का दौर चल रहा हैं वहीं दूसरी ओर गायों को बचाने के लिए मोहम्मद फैज खान पदयात्रा कर रहे हैं। फैज 12,000 किलोमीटर की यह पदयात्रा लेह से कन्याकुमारी तक करने वाले है। गौ सेवा सद्भावना पदयात्रा नाम से शुरू हुई यह पदयात्रा को लोगों को गायों के संरक्षण के लिए जागरूक करना है। बुधवार को फैज 130 दिनों की 2,100 किलोमीटर की पदयात्रा करके उत्तर प्रदेश के वाराणसी पहुंचे। फैज ने बताया कि वह रोज 20 से 25 किलोमीटर पैदल चलते हैं। उन्हें उम्मीद है कि वह जनवरी 2019 तक अमृतसर पहुंच जाएंगे। उन्होंने बताया कि उनकी इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य यह है कि गौ सेवा के माध्यम से लोगों के बीच साम्प्रदायिक सदभावना को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि लोगों को गाय का संरक्षण करना चाहिए जो मानव की जिंदगी बचाती है। उन्हें इस बात का दुख है कि उस गाय के संरक्षण के नाम पर हिंसा हो रही है।
फैज ने बताया कि उन्होंने 24 जून को उनकी यात्रा लेह से सिंधु दर्शन उत्सव के दौरान की थी। यात्रा दो चरणों में पूरी होगी।इसमें पहले चरण की पदयात्रा में जम्मू और कश्मीर,हिमाच प्रदेश, पंजाब,उत्तराखंड,उत्तरप्रदेश,बिहार,वेस्टबंगाल,उड़ीसा,झारखंड,छत्तीसगढ़,महाराष्ट्र,तेलंगाना,आंध्रप्रदेश और चेन्नई शामिल किया है। दूसरे चरण की यात्रा कन्याकुमारी से अमृतसर की होगी जो केरल, कर्नाटक,गोवा,महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश,गुजरात,राजस्थान,हरियाणा,दिल्ली और पंजाब होते हुए अमृतसर में खत्म होगी।
फैज ने बताया कि वह जहां जाते हैं, वहां लोगों को गऊ कथा के माध्यम से गायों का महत्व बताते हैं। फैज ने बताया कि यह काम करने की प्ररेणा उन्हें गाय की आत्मकथा से मिली। उसके बाद उन्होंने फैसला किया कि वह अपनी जिंदगी जानवरों के संरक्षण के लिए समर्पित कर देंगे। उन्होंने बताया कि मदरसा की जगह उन्होंने उनकी प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर रायपुर से पढ़ाई की। उसके बाद राजनीति शास्त्र में एमए किया। उन्होंने दो साल तक एक सरकारी स्कूल में पढ़ाया, उसके बाद गायों को बचाने के लिए नौकरी छोड़ दी और यह यात्रा शुरू की। वाराणसी में चार दिनों तक रुके फैज यहां विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित किए गए कार्यक्रमों में शामिल हुए। यह यात्रा आरएसस से सबद्ध विंग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा आयोजित की जा रही है।






