नया अध्ययन खोलता है तनाव और नींद की कमी का गहरा संकट
बेंगलुरु (19 मई 2026): देशभर के टियर-1 और टियर-2 शहरों में किए गए एक बड़े सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कपिवा के अध्ययन (कांतार सर्वे पर आधारित) के मुताबिक, उच्च रक्तचाप से पीड़ित 82% भारतीय मरीज अपना हाई बीपी मुख्य रूप से तनाव को मानते हैं, जबकि आहार को कम महत्व देते हैं।
युवाओं पर सबसे ज्यादा असर
25-44 साल के युवा मरीजों में 43% ने कार्यस्थल के तनाव को बहुत अधिक बताया। खराब नींद और लगातार तनाव को 59% मरीजों ने रक्तचाप के उतार-चढ़ाव का प्रमुख ट्रिगर माना। दस में से सात मरीज जो फ्लक्चुएशन महसूस करते हैं, वे इसे हर हफ्ते अनुभव करते हैं।
शारीरिक और मानसिक प्रभाव
- 43% मरीजों को बार-बार सिरदर्द
- 29% में चिंता और बेचैनी
- 18% को तेज दिल की धड़कन (जिनमें आधे इसे असहनीय बताते हैं)
अध्ययन बताता है कि हाइपरटेंशन अब दो बार सालाना डॉक्टर के पास जाकर मैनेज करने वाली बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह मरीजों के रोजमर्रा के जीवन का स्थायी हिस्सा बन चुकी है।
आयुर्वेद की ओर झुकाव बढ़ा
सर्वे में सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि 60% हाइपरटेंशन मरीज रक्तचाप नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेदिक जूस आजमाने को तैयार हैं। युवा वर्ग (25-44 वर्ष) में यह इच्छा और भी मजबूत है- 73%।
35% मरीज पहले से ही अपनी एलोपैथिक दवाओं के साथ घरेलू उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय हैं:
- नींबू पानी (71%)
- आंवला (57%)
- लहसुन (53%)
- अर्जुन छाल (39%)
हालांकि, नियमितता बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौती है।
कपिवा फाउंडर एवं सीईओ अमीव शर्मा ने कहा, कि “अध्ययन साफ दिखाता है कि भारत में हाई बीपी अब सिर्फ दिल की समस्या नहीं, बल्कि बढ़ते तनाव और खराब जीवनशैली की समस्या है। दवाओं के साथ-साथ तनाव प्रबंधन और बेहतर आदतें भी उतनी ही जरूरी हैं।”
चीफ इनोवेशन ऑफिसर डॉ. आर. गोविंदराजन ने जोड़ा, “हाइपरटेंशन अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई। युवाओं में क्रॉनिक तनाव, नींद की कमी और ‘हमेशा-ऑन’ जीवनशैली हृदय स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। हमें समग्र दृष्टिकोण की जरूरत है।”
बता दें कि फरवरी 2026 में मुंबई, दिल्ली NCR, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और अहमदाबाद में 303 मरीजों (25-65+ वर्ष) पर सर्वे किया गया।






