कृषि वैज्ञानिक ने फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए कीटनाशक प्रोटीन के एकीकरण पर दिया जोर

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  • सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया
  • नौ विद्यालयों के 500 से अधिक बच्चों ने सीमैप का किया दौरा

सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान ने शुक्रवार को अपने लखनऊ परिसर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया। इस अवसर पर सीएसआईआर-एनबीआरआई लखनऊ के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रद्युमन कुमार सिंह मुख्य अतिथि थे। इस अवसर पर, संस्थान ने आम जनता तथा स्कूली बच्चों के लिए ‘ओपेन डे’ रखा, ताकि वैज्ञानिक तकनीक व उपकरणों का एक्सपोज़र प्रदान करके उनके बीच उत्सुकता एवं वैज्ञानिक प्रवृत्ति उत्पन्न की जा सके।

डॉ. पी के सिंह ने फसल उत्पादन में सुधार की आवश्यकता पर बात की। उन्होंने फसलों को कीड़ों से पहुंचने वाले अत्यधिक नुकसान से बचाने के लिए कीटनाशक प्रोटीन के एकीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से कपास और उसके पौधों पर हमला करने वाले विभिन्न कीड़ों पर बात की, खास तौर पर व्हाइटफ़्लाय, जिनके संक्रमण के कारण कपास की फसल को भारी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रकृति की ओर देखना चाहिए क्योंकि प्रकृति के पास ऐसे अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर मौजूद हैं।

इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक, एनआईपीजीआर, नई दिल्ली डॉ. नवीन चंद्र बिष्ट ने ग्लूकोसाइनोलेट्स पर विशेष जोर देते हुए सेकेंडरी मेटाबॉलिज़्म एवोल्यूशन के बारे में बात की। अपने व्याख्यान के माध्यम से, उन्होंने दर्शकों को मिथाइल-थिओ-अल्काइल-मलेट-सिंथेस के एवोल्यूशन के आणविक आधार अथवा ब्रैसिका (सरसों) परिवार में मेथिओनिन डिरायव्ड ग्लूकोसाइनोलेट्स की विविधता के बारे में भी अवगत कराया गया।

सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने उद्योग और किसानों के लिए उनसे होने वाले दूरगामी लाभ के बारे में बताया।

संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. ए.एस. नेगी, जो आयोजन समिति के अध्यक्ष भी थे, द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ समारोह का समापन हुआ। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ आभा मीना और डॉ. आकांक्षा सिंह ने किया।

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