सकारात्मक सोच से ही मिलेगी सफलता

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किसी ने सच कहा है कि असफलता के बीच से ही सफलता का रास्ता निकलता है, यह अलग बात है कि हम असफलता के बाद ही इतना परेशान हो जाते हैं कि अगली बार कुछ भी पाने की कोशिश नहीं करते हैं, जिसके कारण हमारी सफलता का दौर शुरू होने से पहले ही बाधित हो जाता है। खास बात तो यह है कि इसी भीड़ से कुछ लोग आपको हतोत्साहित नहीं करते, बल्कि असफलता के बीच से ही सफलता के नए-नए आयाम ढूंढ लेते हैं, जो इस आयाम का सहारा लेकर कुछ नया करने का प्रयास करते रहते हैं, वे नि:संदेह एक दिन कुछ खास कर जाते हैं।

किसी ने सच कहा है कि असफलता के बीच से ही सफलता का रास्ता निकलता है। यह अलग बात है कि हम असफलता के बाद ही इतना परेशान हो जाते हैं कि अगली बार कुछ भी पाने की कोशिश नहीं करते हैं, जिसके कारण हमारी सफलता का दौर शुरू होने से पहले ही बाधित हो जाता है। खास बात तो यह है कि इसी भीड़ से कुछ लोग आपको हतोत्साहित नहीं करते, बल्कि असफलता के बीच से ही सफलता के नए-नए आयाम ढूंढ लेते हैं, जो इस आयाम का सहारा लेकर कुछ नया करने का प्रयास करते रहते हैं, वे नि:संदेह एक दिन कुछ खास कर जाते हैं, जिसके कारण उनकी पहचान देश- विदेश में ही नहीं, बल्कि इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में सदा के लिए लिख दिए जाते हैं।

मैं यहां आगे बढऩे से पहले बल्ब के आविष्कारक थॉमस एडिसन की एक छोटी सी घटना पर प्रकाश डालना चाहूंगा। गौर करने की बात तो यह है कि एक बार जब थॉमस ने बल्ब का आविष्कार किया, तो लोगों ने उनसे प्रश्न किया कि आप का प्रयोग करीब दो हजार बार फेल होने के बाद आपको अब जाकर सफलता मिली है। इसके जवाब में एडिसन ने कहा कि आपकी सोच गलत है, क्योंकि मेरा प्रयोग दो हजार बार फेल नहीं हुआ, बल्कि बल्ब का आविष्कार का प्रयोग दो हजार प्रयोग के बाद पूरा हुआ। इस वाक्य से बहुत ही सकारात्मक सोच की अनूभूति होती है। अगर हमारे अंदर इस तरह की सोच होगी, तो हमारे बीच से हजारों की संख्या में थॉमस एडिसन और न्यूटन जैसे सकारात्मक और सफल व्यक्तियों का आगाज होता रहेगा। सफल होना हर किसी के जीवन का लक्ष्य होता है। सभी लोग सफल होना चाहते हैं और उसके लिए कोशिश भी करते हैं, जिसके लिए हम अपनी लाइफ का अच्छा खासा समय उसे सजाने में लगा देते हैं। यह अलग बात है कि हमारी सफलता का अनुपात कुछ समय ज्यादा तो कुछ समय कम होता है। कुछ लोगों को सफलता ज्यादा मिलती है, तो कुछ लोगों को सफलता देर से मिलती है, तो कुछ लोगों को सफलता देर से मिलती है। इसके पीछे सभी के विचार भी अलग होते हैं।

सक्सेस मंत्र

  • हमेशा लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा तय करें, सबसे बड़ी बात तो यह है कि अगर हम सौ प्रतिशत सफलता का लक्ष्य बनाएंगे, तो कुछ हद तक तो सफलता जरूर मिलेगी। अगर हमें पूरी सफलता नहीं मिलेगी, तो भी हम कुछ हद तक तो सफलता पा ही जाएंगे।
  • सफलता के लिए जरूरी है कि हमारे अंदर आत्मविश्वास के साथ आत्मज्ञान और संयम भी हो।
  • हमेशा सकारात्मक सोच रखें और नकारात्मक सोच को दरकिनार कर दें।
  • हमें हमेशा अपने लक्ष्य को याद रखना चाहिए, लक्ष्य के अनुसार ही काम करना चाहिए।
  • जहां तक संभव हो अपने आपको भ्रांतियों से बचाकर ही रखें और अपने को समय के अनुसार ही ढालें।
  • सफलता की सभी कहानियां उसके असफलता से ही निकलती हैं।

आज में जीने वाला व्यक्ति सदा खुशहाल भविष्य का भागीदार होता है। हमारा यहां यह बिलकुल भी नहीं कहना है कि आज को आप पूरी तरह ऐश करने में ही बिता दें यानी बर्बाद कर दें, तो आपका भविष्य उज्ज्वल है। यहां आज में जीने का मतलब बहुत ही सामान्य है कि आप आज में जिएं और भविष्य के लिए तैयारियां करें। उदाहरण के तौर पर अगर हम परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो हमें वर्तमान में जी कर यानी पूरी तरह से अटेंटिव होकर अपनी पढ़ाई करनी चाहिए। इस दौरान न तो नौकरी के बारे में सोचना चाहिए और न ही परीक्षा के परिणाम के बारे में चिंता करनी चाहिए। अगर परीक्षा देने वाला छात्र परिणामों या अन्य सवालों के चक्कर में पड़ जाएगा तो वर्तमान दौर में वह अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर नहीं दे पाएगा। फिर न तो परीक्षा का रिजल्ट अच्छा आएगा और न ही अच्छी नौकरी की उम्मीद की जा सकती है।

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