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सुख के सब साथी, दुख में न कोय!

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इंसानियत को बेनकाब करती यह तस्वीर ऐशबाग की रिहायशी रेलवे कालोनी, मनोरजंन केन्द्र से कुछ दूर पर स्थित पानी की टंकी के पास की हैं जहाँ एक बाबा पिछले तीन दिन से खुले आसमान के नीचे झाडियों के बीच भूख और प्यास से तड़पते अचेत अवस्था में पड़े हैं बाबा के हालात कदर ख़राब हैं कि वह बस अब अपनी मौत का इंतजार कर रहे है शरीर पर कपड़े नाम मात्र है और पैर में दर्द की वजह से एक सफेद कपड़ा बंधा है और उनकी बैसाखी नीचे उनके पास पड़ी है शरीर में ताकत न होने की वजह से वह बिलकुल उठ नहीं पा रहे है हजारों लोग उन्हें उस रास्ते से रोज गुजरते हुए देखते है लेकिन मदद के लिए कोई हाथ नहीं बढ़ाता। बाबा को अब सिर्फ भगवान का ही इंतजार है क्योकि भगवान के बनाएं बन्दों ने तो उनसे मुंह मोड़ लिया है। Photo: Shagunnewsindia,com

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