जयपुर में कलराज की सहजता 

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
कलराज मिश्र की सहजता राजस्थान में चर्चा का विषय बनी। वह आम नागरिक की तरह मंदिर गए, चौराहों पर रुके, लोगों से मिले। राजस्थान के राज्यपाल पद ग्रहण करने के बाद कलराज मिश्र पत्रकारों से मुखातिब हुए। इसमें उन्होंने संवैधानिक दायरे के अनुरूप अपनी जिम्मेदारी निर्वाह की बात कही। वह राजस्थान के आमलोगों से भी अपनी सहज कार्यशीली के अनुरूप मिले। कहा जा रहा है कि वह राजभवन के दरवाजे आमजन के लिए खुले रखेंगे। राजस्थान के इक्कीसवें राज्यपाल हैं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति  रविन्द्र एस. भट्ट ने उन्हें राज्यपाल पद की शपथ दिलाई। कलराज मिश्र को राजभवन में गार्ड आॅफ आॅनर पेश किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल की धर्मपत्नी सत्यवती मिश्रा सहित उनके परिजन मौजूद थे।
इस मौके पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, विधानसभा अध्यक्ष  सी.पी. जोशी, उप मुख्यमंत्री श्सचिन पायलट, केन्द्रीय मंत्रीगण, राज्य मंत्री मण्डल के सदस्यगण, विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता गुलाब चंद कटारिया,सहित अनेक लोग उपस्थित थे। कलराज मिश्र का जन्म एक जुलाई उन्नीस सौ इकतालीस को उत्तर प्रदेश में गाजीपुर जिले के मलिकपुर सैदपुर ग्राम में हुआ। वाराणसी में महात्मा गांधी विद्यापीठ से एमए की शिक्षा प्राप्त की। तीन बार राज्य सभा सदस्य रहे। उत्तर प्रदेश विधानसभा के भी तीन बार सदस्य रहे। प्रदेश में लोक कल्याण और केंद्र में लघु एवं मध्यम एन्टरप्राइजेज विभाग के केन्द्र में मंत्री रहे।
राज्यपाल बनने के बाद भी वह आम आदमी की तरह मंदिर गये। साधारण गाड़ी में बैठे, लाल बत्ती पर रूके, कोई लाव लष्कर नहीं था। कहा कि लोगों की सुविधा का ध्यान रखना है। वह मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर में पूजा अर्चना करने गए। राजभवन अतिथि गृह में अशोक स्तम्भ लगी गाड़ी पर बैठने से इनकार कर दिया। वह साधारण गाडी से गए। वह आम आदमी की तरह राजभवन से निकले। उनके लिए कहीं ट्रफिक नहीं रोका गया।

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