टिप्पड़ी: पंकज चतुर्वेदी
भारत के वे हिंदी चैनल जो एक महीने से भौकाल किये थे कि अब आतंकी चलाएंगे पाकिस्तान की सरकार, हाफ़िज़ सईद बनेगा प्रधान मंत्री आदि आदि। उन्हें शर्म नहीं आएगी कि उनके प्रति विश्वसनीयता का संकट खड़ा हो गया है, पाकिस्तान में हाफिज सईद का कोई भी उम्मीदवार जीता नहीं, कई कट्टरपंथी हार गए, अभी तक पकिस्तान की सत्ता में या तो पंजाब में असर वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग का दबदबा रहा या फिर सिंध की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का .. इस बार सत्ता पठान के हाथ आई है।
खान अब्दुल गफ्फार खां यानि सीमान्त गांधी याद है न! पठान हर समय विभाजन के खिलाफ रहा, भारत को दोस्त समझता रहा। फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के बाबा, जो एक पठान थे, उस समय उस पार से भारत आये थे, जब इस तरफ का मुसलमान पकिस्तान जा रहा था।
उम्मीद की जाती है कि इमरान खान प्रगतिशील नज़रिए से दो मुल्कों के ताल्लुकात के बारे में सोचेगा। सिंध और पंजाब के अधिकांश नेता जमींदार रहे है और उनकी जिद से ही पकिस्तान बना था। यानि उनकी सियासत की नीवं ही हिंदुस्तान से नफरत थी। शायद इमरान खान के मतदाताओं को संतुष्ट करने को उसे हिंदुस्तान को कोसना ना पड़े।
इमरान खान ने अपने चुनाव प्रचार में इंडिया के हिंदी मिडिया के कुप्रचार को भी निशाना बनाया था, उसने अपने भाषण में इंडिया जैसे विकास वाले मुल्क बनने का वायदा किया था, उसकी पार्टी के पोस्टर में अमिताभ बच्चन और माधुरी दीक्षित भी थे। उम्मीद हा उसके दिल में दोस्ती का जज्बा होगा।







