Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, July 29
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में कदम

    By July 6, 2018 Current Issues No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    farming
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 501
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया था। इस दिशा में अनेक कदम उठाए गए थे। जिसके कारण चार साल को बेमिसाल माना जा रहा था। इसके पहले किसानों को पर्याप्त यूरिया तक नसीब नहीं होती थी। फसल बीमा की ऐसी प्रणाली लागू थी, जिसका खास फायदा ही नही  था। मोदीं सरकार ने कृषि व्यवस्था को पटरी पर लाने के अनेक प्रयास किया। इस सूची में एक नई उपलब्धि जुड़ी। किसानों को उनकी उपज लागत का अब डेढ़ गुना समर्थन मूल्य दिया जाएगा। यह अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। जो लोग सत्ता में रहते हुए ये सब नहीं कर सके थे, उनकी नजर में यह लॉलीपॉप है। लेकिन वास्तविकता यह है कि ऐसे अनेक कदम मिलकर किसानों की आमदनी को दोगुना बनाने में सहायक होंगे।
    नीम कोटेड यूरिया, मृदा कार्ड, प्रधानमंत्री बीमा योजना, सभी मंडियों को ऑनलाइन जोड़ना, खाद्य प्रसंस्करण में साठ अरब रुपये का निवेश और किसान उत्पादक संघों को छूट जैसे फैसले लिए गए। खरीफ की फसलों के समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोतरी की गई। नौ  करोड़ से ज्यादा किसानों को इसका सीधा लाभ होगा। खरीफ की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में एक सौ अस्सी से अठारह से सत्ताईस रुपए प्रति क्विंटल तक बढ़ोतरी की है। रामतिल  या नाइजर सीड  पर सबसे ज्यादा अठारह सौ सत्ताईस रुपए बढ़ाए गए हैं। मूंग में चौदह सौ रुपए की बढ़ोतरी की गई है।
    सामान्य धान में दो सौ रुपए और ए-ग्रेड धान का सिर्फ एक सौ अस्सी रुपए बढ़ाया गया है। खरीफ की फसलों से जुड़े करीब नौ करोड़ किसानों में से चार  करोड़ धान की खेती करते हैं। किसी फसल का उत्पादन अधिक  होने पर उसका बिक्री मूल्य कम हो जाता है। गिरावट को रोकने के लिए सरकार मुख्य फसलों का एक न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित करती है। बाजार में अगर किसानों को फसलों का उचित भाव नहीं मिल पाता है तो सरकारी एजेंसियां घोषित किए गए न्यनतम समर्थन मूल्य पर उसे खरीद लेती हैं। खरीफ की चौदह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बदलाव किया गया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि चौदह फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य  बढ़ाने से सरकार के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बजट में खाद्य सब्सिडी के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं। सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पार किए बिना अतिरिक्त खर्च का वहन कर लेगी।
    कृषि उत्पदकता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने के लिए केंद्र सरकार ने देश के सभी किसानों को मृदा परीक्षण कार्ड उपलब्ध कराने के लिए  योजना चलायी है। अब तक दस करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किए जा चुके है। वर्ष गत के मुकाबले इस  वर्ष में खाद के उपयोग में दस प्रतिशत तक की कमी और उत्पादन में बारह प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यूपीए सरकार के समय एक सौ चौहत्तर मृदा परीक्षण प्रयोग शालाएं थी। मोदीं सरकार में यह आंकड़ा नौ हजार को पार कर गया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सिंचाई योजना के तहत अनेक कदम उठाए गए है। जिससे सिंचित भूमि का क्षेत्र बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री कृषि कौशल योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान करवाना है। जिससे ग्रामीण युवक कृषि के अलावा अन्य रोजगार कर सकेंगे।
    यूरिया उत्पादन में भारत कुछ समय बाद निर्भर हो जाएगा। गोरखपुर, सिंदरी, बरौनी, तालचर और रामागुण्डम स्थित पांच उर्वरक संयत्रों का पुनरूद्धार कर रही है। गोरखपुर में निर्माणाधीन फैक्ट्री में यूरिया का उत्पादन वर्ष दो हजार बाइस से शुरू हो जाएगा। इन संयत्रों में पैसठ लाख टन यूरिया का उत्पादन होगा। पचपन लाख टन यूरिया का आयात करना पड़ता है। इससे निजात मिलेगी।  देश में सालाना लगभग तीन सौ दस लाख टन उर्वरक उत्पादन होता है। नीम कोटिंग यूरिया से खपत में  कमी दर्ज की गई। इससे खेती की लागत में कमी आई है। किसानों को इसका फायदा हो रहा है। गोबर-धन योजना पर भी अमल हो रहा है। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। बाईस  हजार ग्रामीण हॉट को ग्राम बाजार से जोड़ेगी। कृषि उत्पादों के निर्यात को सौ अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी सरकार ने रखा है। सिंचाई के पानी की कमी से वाले छियानबे  जिलों को छब्बीस सौ करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
    किसानों को बिजली का असली फायदा देने के लिए अब फीडर लाइन को अलग किया जाएगा। अलग बिजली फीडर होने से किसानों को बिजली सब्सिडी सीधे बैंक खाते में देने की व्यवस्था शुरू की गई।
     प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों की फसल को प्राकृतिक आपदाओं के कारण पहुंची क्षति को प्रीमियम के भुगतान द्वारा एक सीमा तक कम किया जा सकेगा। इसके अंतर्गत अट्ठासी करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिससे किसानों के प्रीमियम का भुगतान देकर एक सीमा तक कम किया जा सके। यह खरीफ और रबी की फसल के अतिरिक्त वाणिज्यिक और बागवानी फसलों को भी सुरक्षा प्रदान करेगी। किसानों के लिए ब्याज-दर को घटाकर केवल चार प्रतिशत कर दिया गया। सरकार इस योजना के अंतर्गत ब्याज का पांच प्रतिशत भाग किसानों को वापस करेगी। नए प्रस्ताव के अनुसार केंद्र सरकार किसानों के ब्याज में दो प्रतिशत की सब्सिडी देगी। सही समय पर कर्ज वापस करने वाले किसानों को ब्याज में मात्र तीन प्रतिशत की अतिरिक्त राहत दी जाएगी। इसमें तीन लाख तक के कर्ज की सुविधा भी दी गई है।
    जाहिर है कि पिछले चार वर्षों में मोदी सरकार ने किसानों की उन्नति के लिए कारगर कदम उठाए है। दस करोड़ किसानों को मृदा परीक्षण कार्ड उपलब्ध करा देना साधारण उपलब्धि नहीं है। इस योजना से यूपीए सरकार भी परिचित थी। लेकिन वह खानापूर्ति में लगी रही। नीम कोटिंग यूरिया में यूपीए की लापरवाही आश्चर्यजनक थी। किसानों को सस्ता कर्ज ,भंडारण, बाजार, की दिशा में भी प्रगति हो रही है। समर्थन मूल्य में बढोत्तरी से किसानों को लाभ होगा। यह उम्मीद करनी चाहिए कि निर्धारित समय सीमा में किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। सरकार के प्रत्येक कदम उसी दिशा में बढ़ रहे है।

    Keep Reading

    देह से परे, आत्मा के समीप; एक निष्काम प्रेम-यात्रा

    Dharmendra 'Pradhan' may face action

    धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: नैतिकता नहीं, भारी आक्रोश के चलते शिक्षा मंत्री पद से हटे

    “My children are inside; I am standing outside” – This hell of child labor must end now.

    ‘मेरे बच्चे अंदर हैं, मैं बाहर खड़ा हूँ’ – बाल श्रम की इस नरक को अब बंद होना चाहिए

    the-nations-future-on-the-streets-of-delhi

    दिल्ली की सड़कों पर देश का भविष्य!

    क्रूर नियति के बीच हमारी क्रूरता और उम्मीद की कुछ किरणें

    The battle between development and the environment in Uttarakhand.

    उत्तराखंड में विकास बनाम पर्यावरण की जंग

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव: कुलदीप माइती की अहम भूमिका, भाजपा टिकट पर लड़ सकते हैं चुनाव?

    July 28, 2026

    मोदी जी का सिपाही! रूपेश पाण्डेय की मेहनत रंग लाई, बिहार में गूंज रहा नाम

    July 28, 2026

    देह से परे, आत्मा के समीप; एक निष्काम प्रेम-यात्रा

    July 28, 2026

    McVitie’s की पैरेंट कंपनी का 2030 तक बेहतर न्यूट्रिशन वाले प्रोडक्ट्स की सेल दोगुनी करने का लक्ष्य

    July 28, 2026
    Mojtaba Khamenei's open support for Hezbollah.

    मोजतबा खामेनेई का हिजबुल्लाह को खुला समर्थन

    July 28, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading